होली भारत के सबसे जीवंत और आनंदपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को फिर से रंगने, मन की दूरियों को मिटाने और खुशी साझा करने का अवसर है। लेकिन समय के साथ होली के रंगों का स्वरूप बदल गया है। जहां पहले फूलों, हल्दी और प्राकृतिक तत्वों से रंग बनाए जाते थे, वहीं आज बाजार में मिलने वाले अधिकतर रंग केमिकल आधारित होते हैं। यही वजह है कि अब समाज में धीरे-धीरे एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है—लोग organic गुलाल की ओर लौट रहे हैं।
इसी जागरूकता को बढ़ाने में कई पर्यावरण-समर्थक उद्यम और महिलाएं आगे आ रही हैं। Sarita Singh जैसी उद्यमी, जो Borlong Bio Technologies Private Limited की प्रबंध निदेशक हैं, प्राकृतिक और जैविक उत्पादों के माध्यम से sustainable living का संदेश दे रही हैं। Lucknow स्थित उनकी कंपनी कृषि-आधारित जैविक उत्पादों के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल सोच को भी प्रोत्साहित करती है, जो ऐसे त्योहारों के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।

बदलती होली: रंगों की परंपरा से आधुनिक चुनौतियाँ
प्राचीन समय में होली का संबंध प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ था। लोग टेसू (पलाश) के फूल, हल्दी, चंदन, गुलाब और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से रंग तैयार करते थे। ये रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित होते थे, बल्कि कई बार औषधीय गुणों से भरपूर भी होते थे।
लेकिन औद्योगिक युग के बाद सस्ते और चमकीले रंगों की मांग बढ़ी, जिसके कारण केमिकल रंगों का उत्पादन तेजी से बढ़ा। इन रंगों में अक्सर भारी धातुएं, सिंथेटिक डाई और औद्योगिक रसायन होते हैं, जो त्वचा, आंखों और पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं।
आज की होली में लोगों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उनमें शामिल हैं:
- त्वचा पर रैश और एलर्जी
- बालों का झड़ना और रूखापन
- आंखों में जलन
- जल और मिट्टी का प्रदूषण
इन्हीं चुनौतियों ने लोगों को फिर से प्रकृति की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया है।

Organic गुलाल: स्वास्थ्य और पर्यावरण का संतुलन
ऑर्गेनिक गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों से बनाए जाते हैं। इनमें किसी प्रकार के सिंथेटिक रसायन या जहरीले तत्व नहीं होते। ये रंग पौधों, फूलों, प्राकृतिक पाउडर और सुरक्षित बेस सामग्री से तैयार किए जाते हैं।
इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये त्वचा के अनुकूल होते हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते। यही कारण है कि आज स्कूलों, संस्थानों और परिवारों में ऑर्गेनिक रंगों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
क्यों जरूरी है Organic गुलाल अपनाना
स्वास्थ्य सुरक्षा
Organic रंग त्वचा पर सौम्य होते हैं। इनसे एलर्जी या संक्रमण की संभावना बहुत कम होती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह विशेष रूप से सुरक्षित विकल्प है।
पर्यावरण संरक्षण
केमिकल रंग जल स्रोतों और मिट्टी को प्रदूषित करते हैं। इसके विपरीत, ऑर्गेनिक गुलाल आसानी से नष्ट हो जाते हैं और प्रकृति के चक्र में घुल जाते हैं।
जल संरक्षण में सहायक
ऑर्गेनिक रंग हल्के होते हैं और इन्हें साफ करने में कम पानी लगता है। इससे पानी की बचत होती है।
प्राकृतिक, सुगंध और सौम्यता
इन रंगों में प्राकृतिक खुशबू होती है, जो उत्सव को और आनंदमय बनाती है।

महिलाओं और आत्मनिर्भरता का नया अवसर
Organic गुलाल केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा हुआ है। कई स्वयं सहायता समूह और महिला स्टार्टअप प्राकृतिक रंगों का उत्पादन करके आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
महिलाएं घर-आधारित इकाइयों में प्राकृतिक सामग्री से गुलाल तैयार कर रही हैं और स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेच रही हैं। इससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
समाज में बढ़ती जागरूकता
पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों, कॉलेजों, एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं द्वारा “ग्रीन होली” अभियान चलाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग ऑर्गेनिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
अब लोग केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे जिम्मेदारी के साथ उत्सव मनाने की सोच को अपनाने लगे हैं।
Sustainable त्योहार की ओर एक कदम
होली का असली आनंद तभी है जब इसमें खुशियां हों, स्वास्थ्य हो और प्रकृति का सम्मान भी हो। ऑर्गेनिक गुलाल अपनाना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है—अपने शरीर, समाज और पर्यावरण के प्रति।
जब हम प्राकृतिक रंगों से होली खेलते हैं, तो हम केवल रंग नहीं लगाते, बल्कि एक सकारात्मक संदेश भी फैलाते हैं—कि परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ते हुए भी हम प्रकृति से जुड़े रह सकते हैं।
आज जरूरत है कि हम अपनी त्योहार परंपराओं को स्वस्थ और टिकाऊ बनाए रखें। ऑर्गेनिक गुलाल अपनाकर हम न केवल खुद को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा देते हैं।
इस होली रंगों के साथ-साथ जिम्मेदारी भी साझा करें—ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और खुशहाल त्योहारों का आनंद ले सकें।
