28 जुलाई 2025 सावन का तीसरा सोमवार है, जो शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, व्रत और रुद्राभिषेक के साथ की जाती है। इस बार का सोमवार और भी खास है क्योंकि विनायक चतुर्थी का संयोग बन रहा है, जिससे शिव और गणेश दोनों की पूजा का पुण्य प्राप्त होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन कई शुभ योग लेकर आया है जैसे लक्ष्मी योग, रवि योग और अमृत काल। इन योगों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। जलाभिषेक के लिए श्रेष्ठ समय सुबह 5:40 बजे से शाम 5:35 बजे तक है, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा।
पूजा विधि, राशियों के लिए उपाय और भद्रा काल की सावधानी
शिव पूजा की पारंपरिक विधि में गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। उसके बाद बेलपत्र, सफेद पुष्प, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना शुभ माना जाता है। रुद्राष्टाध्यायी और शिव चालीसा का पाठ कर आरती की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है। भक्त दिन भर उपवास रखकर फलाहार करते हैं। इस दिन वृषभ, मिथुन, कन्या, धनु और कुम्भ राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी समय है। इन्हें शिव को चावल, बेलपत्र पर मंत्र लिखकर अर्पण करने और दीपदान करने से विशेष फल मिल सकता है। हालांकि इस दिन भद्रा काल सुबह 10:57 से रात 11:24 तक रहेगा, अतः इस काल में पूजा करना वर्जित माना गया है। देश भर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर दी गई हैं। प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन, देवघर जैसे तीर्थ स्थलों पर विशेष सजावट, कांवड़ यात्रा और भव्य आरतियां आयोजित होंगी। सावन का यह सोमवार न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम अवसर भी है। श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई पूजा से शिव कृपा अवश्य मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।