
इस भीषण गर्मी ने कई स्वास्थ्य संबंधी बिमारियों को जन्म दिया है जिसमें आई स्ट्रोक भी शामिल है। दरअसल, सूरज की किरणों के सीधे संपर्क में आने से आई स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। जानकारी के मुताबिक, ऑप्टिक नर्व के फ्रंट पार्ट में स्थित टिश्यूज में ब्लड फ्लो की कमी से आई स्ट्रोक हो सकता है। इसे ‘एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी’ भी कहा जाता है और यह काफी घातक होता है।
क्या है आई स्ट्रोक ?

डॉक्टर निकिता ने बताया कि आई स्ट्रोक वह स्थिति है, जिसमें आखों के ऑप्टिक नर्व के फ्रंट पार्ट के टिशु में ब्लड सप्लाई कम हो जाती है। ऐसे में आपकी आंखों में मौजूद रेटीना की नसें और आर्टरीज सुचारू रूप से काम करना बंद कर देती हैं। इस स्थिति में आखों का पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है। जिस कारण आखों में थक्का बनने या फिर आर्टरीज में सिकुड़न आने की भी संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में नजरें भी कमजोर हो जाती हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।
आई स्ट्रोक के लक्षण

आई स्ट्रोक के कई लक्षण है, इनमें आंखों में सूखापन, लगातार आँखों में जलन, आँखों से धुंधला दिखाई देना, आंखो में सूजन, एक आंख में अचानक दृष्टि हानि और लाइट सेंसिटिविटी भी शामिल हैं। अगर इनमें से आपको कोई लक्षण दिखाई देता हो तो तुरंत से डॉक्टर से मिलें।
आई स्ट्रोक होने पर लोगों को सुबह उठने के साथ ही एक आंख से कम दिखता है, जोकि इसके लक्षणों में से एक हैं। डॉक्टर्स के अनुसार, अक्सर लोगों को नींद टूटने के बाद सुबह 3 से 4 बजे के बीच यह स्ट्रोक आता है।
आई स्ट्रोक से कैसे करें बचाव

आई स्ट्रोक से बचने के लिए आखों के आस-पास मसाज करते रहें, इससे आखों के पीछे का संवेदनशील हिस्सा रेटीना खुलने लगता है।
लेजर ट्रीटमेंट द्वारा भी इस समस्य़ा को ठीक किया जाता है। हालांकि कुछ ही मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है।
आर्टरीज के ब्लॉकेज को खोलने के लिए आप कार्बन डायॉक्साइड का भी सहारा ले सकते है। इससे रेटीना तक ऑक्सीजन और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं तो स्क्रीन से कुछ देर के लिए ब्रेक लेते रहें इससे आंखों पर दबाव कम पड़ेगा।
आंखों में लुब्रिकेंट डालते रहें, जिससे ड्राइनेस से राहत मिल सकती है। और आंखों में जलन या धुंधलापन महसूस हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें।