
क्या आप अक्सर यह सोचने में अपना वक्त बर्बाद करती हैं कि ”लोग क्या कहेंगे”। इसका असर सिर्फ आप पर पड़ता है दूसरों पर नहीं। लोगों की कही गई बातों पर बहुत अधिक सोच-विचार न करें। क्योंकि व्यक्तित्व के सही विकास के लिए दूसरों की सोच जरुरी नहीं होती हैं। दूसरों की राय के जाल में फंसना आसान है, लेकिन आपको यह जानना होगा कि दूसरों के बारे में चिंता करना कैसे बंद करें।
भले ही आप दुनिया के सबसे बड़े और आकर्षक व्यक्तित्व वाले ही क्यों न हो, फिर भी आपको ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्हें आप पसंद न आएं।

“लोग क्या कहेंगे?” एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिससे ज्यादातर लोग चिंतित और परेशान रहती है। उन्हें लगता है कि जैसे उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। हमारे यहां किसी की प्रतिष्ठा हमेशा इस बात पर निर्भर करती है, कि लोग क्या सोचते और कहते हैं। आमतौर पर यह किसी की काबिलियत पर आधारित नहीं होती है।

ऐसे कई तरीके हैं, जिनकी मदद से अपनी सोच और विचार को दृढ़ बनाया जा सकता है बिना यह सोचे कि दूसरे लोग क्या कहेंगे।
स्वयं के प्रति जागरुक रहें
हमेशा पूर्णता के लिए प्रयास न करें। बस बेहतर करते रहने का लक्ष्य रखें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम करती रहें। याद रखें कि आप भी गलतियां कर सकती हैं और उन गलतियों से हमें सीख ही मिलती है। याद रहे, गलतियां करने से ही व्यक्ति सीखता है और अपने लक्ष्य को हासिल करता है।
आपके विचार अच्छे हैं
अपने इरादे और तर्क को देखने और जानने के लिए सबसे अच्छा लेंस आपके पास ही है। दूसरा व्यक्ति कभी भी यह नहीं समझ सकता कि आपकी सोच कैसी है या क्यों है। आप खुद ही निर्धारित करें कि आपके लिए सबसे अच्छा काम क्या हो सकता है।
खुद से प्यार करने की आदत डालें
जितना ज्यादा आप अपने आप को प्यार करती हैं और अपने निर्णय को स्वीकार करती हैं, तो उतनी ही आपको दूसरों की जरूरत कम पड़ेगी। आप जितना हो सकें उतना पॉजिटिव सोचें। और अपने हर निर्णय को प्यार से स्वीकार करें और उस पर कार्य करें। आप जितना अधिक अपने आप से प्यार करेंगे उतना ही आत्मनिर्भर बनेंगे।
अपनी उपलब्धियों को स्वीकार करें
आपने जो हासिल किया है, या आपको जो मिला है उसे स्वीकार करना चाहिए। और आंतरिक स्तर पर अपनी प्रशंसा भी करनी चाहिए।अपने आप को सकारात्मक रूप से सुदृढ़ करें। हमेशा अच्छे की तलाश करें और गलत संगतियों से दूर रहें।
अपने कार्यों पर ध्यान दें
आप लोगों को यह सोचने से नहीं रोक सकतीं कि वे क्या चाहते हैं। आप अपना पूरा ध्यान इस ओर लगा सकती हैं कि आपको क्या करना है। अपने कार्यों और अपने लक्ष्य की ओर अपना ध्यान लगाने में सक्षम होने की बजाय दूसरों की सोच पर विचार कर अपना समय न बर्बाद करें।