आज के डिजिटल युग में जहां साइबर ठगी का शिकार आम लोग हो रहे हैं, वहीं भारतीय मूल की 17 वर्षीय तेजस्वी मनोज ने ऐसा कदम उठाया है जो समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। महज 17 साल की उम्र में तेजस्वी ने साबित किया है कि छोटी उम्र में भी बड़े काम किए जा सकते हैं। उन्होंने ‘शील्ड सीनियर्स (Shield Seniors)’ नामक प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है, जो बुज़ुर्गों को ऑनलाइन ठगी से सुरक्षा देने और उन्हें जागरूक करने का काम करता है।
यह सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की कहानी है। यह कहानी बताती है कि एक युवा लड़की में ज्ञान, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का मेल कैसे बदलाव ला सकता है।
कौन हैं तेजस्वी मनोज?
तेजस्वी मनोज भारतीय मूल की हैं और अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में जन्मीं। बाद में उनका परिवार टेक्सास के फ्रेस्को (Frisco) में शिफ्ट हो गया। तेजस्वी इस समय 17 साल की स्कूल स्टूडेंट हैं। उनके माता-पिता दोनों आईटी प्रोफेशनल्स हैं और उनसे प्रेरित होकर बचपन से ही उनका झुकाव तकनीक की ओर रहा।
आठवीं क्लास तक आते-आते तेजस्वी जावा, पायथन और HTML जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं में दक्ष हो गईं। ‘Girls Who Code’ जैसे कार्यक्रमों से उनका टेक्नोलॉजी के प्रति इंटरेस्ट और बढ़ा। वहीं उन्होंने कोडिंग की औपचारिक शिक्षा लेना शुरू किया। इतनी कम उम्र में ही तेजस्वी ने अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
शील्ड सीनियर्स की स्थापना
तेजस्वी मनोज आज ‘शील्ड सीनियर्स’ नामक एक साइबर सिक्योरिटी प्लेटफ़ॉर्म की संस्थापक हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म बुज़ुर्गों को ऑनलाइन ठगी से बचाने और इसके प्रति जागरूक करने का काम करता है।
यह एक आसान, एआई पावर्ड वेबसाइट है जो अभी प्राइवेट प्रिव्यू में है। इसका उद्देश्य बुज़ुर्गों को डिजिटल ठगी के बारे में शिक्षित करना है। प्लेटफ़ॉर्म पर “Ask” नामक एक चैटबॉट मौजूद है, जो दो लाइनों में आसान जवाब देता है। साथ ही यह ईमेल और संदेशों का 95% सटीकता के साथ विश्लेषण कर सकता है। जरूरत पड़ने पर यह यूजर्स को विश्वसनीय एजेंसियों से जोड़ता है, ताकि वे ठगी की रिपोर्ट कर सकें।
एक घटना बनी प्रेरणा
तेजस्वी के इस मिशन के पीछे एक व्यक्तिगत अनुभव है। फरवरी 2024 में उनके 85 वर्षीय दादा जी एक ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गए थे। एक स्कैमर ने रिश्तेदार बनकर उनसे 2,000 डॉलर की मांग की।
इस घटना ने तेजस्वी को झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि उनके दादा जी ही नहीं, बल्कि बहुत सारे बुज़ुर्ग डिजिटल स्कैम के झांसे में आ जाते हैं। यह घटना बताती है कि हमारे बुज़ुर्ग ऑनलाइन कितने असुरक्षित हैं। इसने तेजस्वी को एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनाने की प्रेरणा दी जो बुज़ुर्गों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचा सके।
कैसे काम करता है ‘शील्ड सीनियर्स’
शील्ड सीनियर्स का उद्देश्य बुज़ुर्गों को साइबर क्राइमों से सुरक्षित रखना, उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों से अवगत कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
इस वेबसाइट के चार मुख्य सेक्शन हैं:
Learn: साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें सरल भाषा में।
Ask: वर्चुअल असिस्टेंट से सवाल-जवाब।
Analyse: संदिग्ध ईमेल या मैसेज की जांच।
Report: ठगी की रिपोर्ट करने के संसाधनों तक पहुंच।
तेजस्वी की कहानी यह भी दिखाती है कि तकनीकी समझदारी के साथ संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
17 साल की उम्र में तेजस्वी ने जो किया, वह केवल तकनीकी नवाचार नहीं है। यह एक ऐसी सोच है जिसमें महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सेवा और तकनीकी कौशल तीनों मिलते हैं। तेजस्वी की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं।
भविष्य की योजनाएं
तेजस्वी का कहना है कि वह ‘शील्ड सीनियर्स’ को और बेहतर बनाना चाहती हैं। आने वाले समय में वह इसमें नई-नई एआई तकनीकों को जोड़कर बुज़ुर्गों के लिए इसे और उपयोगी बनाने की योजना बना रही हैं। उनका सपना है कि हर बुज़ुर्ग व्यक्ति डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।
तेजस्वी मनोज: प्रेरणा की कहानी
तेजस्वी की कहानी बताती है कि न केवल ज्ञान बल्कि समझदारी, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सफलता की चाबी है। एक युवा भारतीय बेटी ने अपने दादा जी के अनुभव से सबक लेकर ऐसा कदम उठाया, जो हजारों बुज़ुर्गों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का एहसास दिला सकता है।
