बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को ज़मीनी स्तर पर सशक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अभिनव और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूलों में नामांकन या परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के जीवन में शिक्षा को स्थायी रूप से शामिल करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इसी सोच के साथ जिले में “डीएम की पाठशाला” का शुभारंभ किया गया है, जो हर बेटी के घर को ज्ञान का केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है।
इस पहल की अगुवाई जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल कर रही हैं। उनका मानना है कि बेटियों की शिक्षा तब ही प्रभावी होगी, जब पढ़ाई स्कूल की चारदीवारी से निकलकर घर तक पहुंचे। कई परिवारों में संसाधनों की कमी के कारण बेटियाँ घर पर पढ़ाई के लिए उपयुक्त माहौल नहीं बना पातीं। डीएम की पाठशाला इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।
विद्यादानी पोटली से बदलेगा पढ़ाई का अनुभव
डीएम की पाठशाला के अंतर्गत जिले की हजारों बेटियों को “विद्यादानी पोटली” प्रदान की गई है। इस पोटली में व्हाइट बोर्ड, स्टडी टेबल, मार्कर और डस्टर जैसे शैक्षणिक उपकरण शामिल हैं। ये सभी सामग्री बेटियों को घर पर पढ़ने, लिखने और दोहराने के लिए एक व्यवस्थित और प्रेरक वातावरण उपलब्ध कराती हैं।
यह पहल बेटियों को अपनी पढ़ाई को स्वयं संचालित करने की आदत भी सिखाती है। अब वे होमवर्क या परीक्षा की तैयारी केवल किताबों तक सीमित न रखकर, बोर्ड पर लिखकर अभ्यास कर सकती हैं। इससे समझने की क्षमता बढ़ेगी और आत्मविश्वास भी मज़बूत होगा।
पहले चरण में 9000 बेटियों को मिला लाभ
इस अनोखी पहल के पहले चरण में जिले की 9000 बेटियों को विद्यादानी पोटली सौंपी गई। इनमें परिषदीय विद्यालयों की 6798 टॉपर छात्राएँ, “ऑल ऑफ ड्रीम्स” योजना के अंतर्गत चयनित 51 प्रतिभाशाली बेटियाँ, और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में_toggle अध्ययनरत 2151 छात्राएँ शामिल हैं।
परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 6, 7 और 8 की दो-दो टॉपर बेटियों को इस पोटली के लिए चुना गया, जिससे मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहन मिल सके और अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणा बने।
शिक्षा के लिए ठोस निवेश
लगभग 9.8 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई 9000 विद्यादानी पोटलियाँ यह दर्शाती हैं कि जिला प्रशासन बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। यह पहल यह भी संकेत देती है कि शिक्षा में किया गया निवेश समाज के दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है।
जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, राजापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल और सदर विधायक योगेश वर्मा ने स्वयं बेटियों को शैक्षणिक सामग्री वितरित की। इस अवसर पर बेटियों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई छात्राओं ने इसे अपने जीवन की पढ़ाई से जुड़ी सबसे उपयोगी सौगात बताया।
विधायक योगेश वर्मा ने कहा कि जिलाधिकारी की यह दूरदर्शी पहल न केवल जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रही है, बल्कि बेटियों में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी पैदा कर रही है। उन्होंने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताया।
शिक्षा का माहौल, परिवार तक असर
डीएम की पाठशाला का प्रभाव केवल छात्राओं तक सीमित नहीं है। जब एक बेटी अपने घर में पढ़ाई के लिए बोर्ड और स्टडी टेबल लगाती है, तो पूरा परिवार शिक्षा से जुड़ता है। छोटे भाई-बहन, माता-पिता और आसपास के बच्चे भी सीखने के लिए प्रेरित होते हैं। इस तरह एक बेटी पूरे समाज में शिक्षा की रोशनी फैलाने का माध्यम बनती है।
यह पहल यह साबित करती है कि यदि सही सोच और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो बेटियों की शिक्षा को मजबूती देने के लिए बड़े बदलाव संभव हैं। डीएम की पाठशाला जिले में शिक्षा के प्रति नई चेतना और विश्वास को जन्म दे रही है।
