
Women Centric Films: बॉलीवुड में हर साल Women Power को लेकर कई फिल्में बनती है जो महिलाओं की बुद्धि और उनकी कबिलियत को एक अलग ही स्तर पर ले जाती हैं। इस महिला दिवस पर हम आपके लिए लाए हैं बॉलीवुड की ऐसी ही 5 ‘Women Empowerment’ पर बनी फिल्में. जिनमें महिलाओं की ‘सशक्त’ भूमिका दिखाई गई है। ये फिल्में महिलाओ के प्रति समाज की सोच व नजरिया बदलने में कारगर साबित हुई हैं।
फिल्म ‘मॉम’

साल 2017 में रिलीज हुई दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की फिल्म ‘मॉम’ एक ऐसी महिला की कहानी है जो अपना बदला खुद लेती है। हमारे देश के कानून में ऐसी बहुत सी कमियां हैं जिसका फायदा उठाकर अपराधी सजा से बच जाते हैं। ऐसा ही श्रीदेवी की सौतेली बेटी के साथ होता है श्रीदेवी की बेटी का बलात्कार करने वाले कोर्ट से बरी कर दिए जाते हैं जिसके बाद वो खुद अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने का ठानती है।
फिल्म ‘कहानी’

साल 2012 में रिलीज़ हुई विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी’ एक ऐसी सशक्त महिला की कहानी पर आधारित है जो बड़ी ही हिम्मत और समझदारी से अपने पति की मौत का न सिर्फ बदला लेती है बल्कि पुरे सिस्टम में फैली गंदगी और अपने पति के अधूरे काम को भी पूरा करती है। इस फिल्म के लिए विद्दा बालन को, दर्शकों का खूब प्यार मिला।
फिल्म ‘थप्पड़’

साल 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘थप्पड़’ में तापसी पन्नू ने एक घरेलू महिला का किरदार निभाया। लेकिन एक थप्पड़ ने उनकी जिंदगी बदली और खुद को इंडिपेंडेंट बनाया। इस फिल्म ने कई कुरीतियों पर तमाचा जड़ा। इस फिल्म के जरिए महिला सम्मान और पुरुषवादी सोचों पर सवाल उठाए गए हैं।
फिल्म ‘छपाक‘

साल 2020 में फिल्म ‘छपाक’ रिलीज़ हुई। जिसमें ‘दीपिका पादुकोण’ सबसे मजबूत Content के साथ प्रस्तुत हुई हैं। इस फिल्म में एक एसिड अटैक सर्वाइवर ‘लक्ष्मी अग्रवाल’ की कहानी को दिखाया गया है। लक्ष्मी अग्रवाल वो लड़की है जिनपर 15 साल की उम्र में, नईम खान नाम के एक सनकी लड़के ने उन पर एसिड अटैक किया था, और लक्ष्मी को जला दिया था उनका कहना है कि मेरे मना करने के बाद उसने मेरे ऊपर एसिड फेका। लेकिन लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और एक लंबी जंग लड़ी। जिससे सुप्रीम कोर्ट ने खुलेआम तेजाब की ब्रिक्री पर रोक लगाई।
फिल्म ‘नीरजा’

एयर होस्टेस ‘नीरजा भनोट’ की असल कहानी पर आधारित इस फिल्म ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। फिल्म में नीरजा भनोट का किरदार ‘सोनम कपूर’ ने निभाया था जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। ये फिल्म भी औरत की उस छुपी हुई ताकत की बात करती है जिसे अक्सर वो खुद ही नहीं समझ पाती.
