
कभी ऑफिस पहुंचने में देरी, कभी मीटिंग मिस करना तो कभी फ्लाइट का छूट जाना, किसी व्यक्ति के अनमैनेजड होने का संकेत देते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि रोज के जीवन में व्यक्ति को कई प्रकार के तनाव और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मगर इसका असर व्यक्ति की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर उस वक्त दिखने लगता है। आमतौर पर लोगों में देखी जाने वाली इस समस्या को ‘time blindness’ कहा जाता है। आइये जानते हैं, क्या है टाइग ब्लाइंडनेस और किन कारणों से होता है टाइग ब्लाइंडनेस,
क्या है टाइम ब्लाइंडनेस ?

टाइम ब्लाइंडनेस उस कॉग्नीटिव कंडीशन को कहते हैं, जिसमें व्यक्ति समय के महत्व को समझने और उसे मैनेज करने में कई समस्याओं का सामना करता है। जिसका प्रभाव प्लानिंग से लेकर पंक्चुएलिटी तक पर पड़ सकता है। नेचुरल टाइम कीपिंग सेंस की कमी के चलते लोग टाइम ब्लाइंडनेस की समस्या के शिकार हो जाते हैं। टाइम ब्लाइंडनेस कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है, मगर कई बार यह समस्या ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर’ का कारण बनने लगती है।
इन कारणों से हो सकता है टाइम ब्लाइंडनेस

अव्यवस्थित दिनचर्या
ऐसे लोग जो अपने कार्यों की प्राथमिकता को सेट नहीं कर पाते हैं। और अक्सर उनकी टू डू लिस्ट अधूरी रह जाती है। ऐसे लोग समय की चिंता किए बगैर अपने अनुसार काम करते है और कार्यों को अगले दिन पर टाल देते हैं। व्यवहार में बढ़ने वाला आलस्य और एनर्जी की कमी इस समस्या को और भी बढ़ा देती है।
एक्ज़ीक्यूटिव डिसफंक्शन
ऐसे लोग ज्यादा समय रेस्टलेस महसूस रहते है, जिसके चलते उनका ध्यान किसी एक काम पर फोकस नहीं हो पाता है। और वे कोई फैसला अकेले नहीं ले पाते और किसी काम की प्लानिंग में भी दिक्कतें आने लगती है। साथ ही इन लोगों की मेमोरी भी प्रभावित होने लगती है।
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानि ADHD के शिकार व्यक्ति बहुत देर तक एक काम पर फोकस नहीं कर पाते है। उनका रैवया प्रोकास्टीनेट होने लगता है। इसके चलते वे डेडलाइंस को मीट करने में असफल साबित होते हैं। इसका असर उनकी परफॉरमेंस पर भी पड़ने लगता है, जिससे आउटपुट में भी कमी आने लगती है।
प्री प्लानिंग की कमी
सुबह उठकर अपने कामों को करने की लिस्ट तैयार करना सबसे जरुरी होता है। लोग जो प्लानिंग के बिना कोई भी कार्य करते हैं। उन्हें अपने कार्यों में कभी सफलता नहीं मिलती है। साथ ही कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए चाहे ऑफिस हो या फिर घर, अपने टारगेट्स को अचीव करने के लिए प्री प्लानिंग ज़रूरी है।
ऑटिज्म की समस्या
इस समस्या से ग्रस्त लोग चीजों को समझने में काफी वक्त लगाते हैं और किसी एक चीज़ पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाते हैं। ये किसी भी चीज़ को प्लान नहीं कर पाते और इस तरह इनका इंपल्सिव व्यवहार सोशल सर्कल को कम कर देता है। ऐसे लोग बहुत हाइपर एक्टिव होते हैं।