By : Nisha Mandal

किसी भी कपल का रिश्ता चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, लेकिन उनके बीच बहस होना स्वाभाविक है। वहीं जब वो पेरेंट्स बनते हैं तो उनके बीच का मतभेद या झगड़ा बच्चे पर बुरा असर डालता है। कई बार घर में बहस होने के दौरान पेरेंट्स ये सोचते हैं कि उनका बच्चा कुछ नहीं समझ रहा लेकिन पेरेंट्स ये गलत सोचते हैं, क्यूंकि उनका बच्चा सब सुनता है, देखता है और समझता भी हैं। जिसका असर उनकी मेंटल हेल्थ पर पड़ता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पेरेंट्स के झगड़े बच्चे की मेंटल हेल्थ को बहुत प्रभावित करते हैं। जिससे उनमें डिप्रेशन और एंग्जाइटी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा उनमें आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना भी कम हो जाती है।
आज हम लोग ये बात करेंगे कि पेरेंट्स के झगड़े का असर बच्चे पर कैसा पड़ता है। इसके साथ ही ये भी जानेंगे कि पेरेंट्स को ऐसी स्थिति को कैसे हैंडल करना चाहिए।
बच्चों को खुश रखने के लिए पेरेंट्स का भी खुश रहना जरूरी
अगर बच्चों को रखना है खुश तो, पेरेंट्स को पहले खुद खुश रहना चाहिए। जिससे आपके बच्चे आटोमेटिक खुश और हँसते-खेलते रहेंगे। इसके लिए सबसे पहले आपको अपने रिलेशनशिप को खुशहाल बनाना चाहिए ताकि आप भी खुश रहें और आपके बच्चे भी खुश रहे। वियतनामी बौद्ध भिक्षु और मशहूर राइटर तिक न्यात हन्ह ने अपनी किताब ‘फिडिलिटी : हाउ टू क्रिएट लविंग रिलेशनशिप दैट लास्ट्स’ में इस बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है।
पेरेंट्स के झगड़े से बच्चों पर असर
पेरेंट्स के झगड़े से बच्चों के मेंटल और इमोशनल हेल्थ पर गहरा असर पड़ता है। जिससे वो हमेशा तनाव महसूस करते हैं और उनमें असुरक्षा की भावना पैदा होती है। पेरेंट्स के बीच हो रहे बहस और झगड़े को देखकर बच्चे घबरा जाते हैं और उनके अंदर अजीब तरीके का डर पैदा हो जाता है। और तो और पेरेंट्स के झगड़े बच्चों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित भी करते हैं।
पेरेंट्स के झगड़े से बच्चों के व्यवहार पर होता है असर
पेरेंट्स के झगड़े का बच्चों के व्यवहार पर सीधा असर पड़ता है। अचानक से बच्चे बहुत ही गुसैल और चिड़चिड़े से हो जाते हैं। जिसकी वजह से कुछ बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी असमर्थ हो जाते हैं, और उनके सोशल बिहेवियर में भी बदलाव आ जाता है। जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा लोगों से बात करना पसंद नहीं आता है।
बच्चे कोई भी रिश्ते को लेकर बहुत इनसिक्योर होते है।
पेरेंट्स के झगड़े का असर बच्चे के साथ-साथ उनके रिश्ते पर तो पड़ता ही है, लेकिन इससे बच्चे में प्यार की जगह डर और झिझक की भी भावना पैदा हो जाती है। जब बच्चे अपने पेरेंट्स के झगड़े को देखते हैं तो, उनका रिश्तों पर से विश्वास कम हो सकता है। और वे भविष्य में अपने संबंधों को लेकर बहुत संकोच में रहते हैं। या यूँ कहें की वे अपने रिश्तों में इनसिक्योर और चिड़चिड़े से हो जाते हैं।
अपने झगड़े को पेरेंट्स ऐसे सुलझाएं
पेरेंट्स को अपने बच्चों के सामने कभी भी झगड़ा या किसी भी प्रकार की बहस नहीं करनी चाहिए। अगर किसी बात पर असहमति है, तो बच्चों से दूर जाकर अकेले में किसी ऐसी जगह पर शांतिपूर्वक तरीके से बात करना चाहिए और उसका हल निकालना चाहिए। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आपका बच्चा कहीं आपकी बातें तो नहीं सुन रहा। क्यूंकि ऐसी बहुत सी बातें होती है बच्चो के सामने नहीं करनी चाहिए और न ही वो आपकी बातें सुन पाए इन सब का भी ध्यान रखना चाहिए।