बचपन से पावरलिफ्टिंग में नाम कमाने का था सपना लेकिन घरवालों के आगे न चल सकी। लेकिन आऱती ने हार नही मानी। शादी और दो बच्चों की जिम्मेदारी के बाद पेशे से डेंटिस्ट आरती अरुण ने दोबारा से अपना सपना जीने के लिए पावर लिफ्टिंग की शुरूआत की। आरती का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ था, जहां खेल-कूद को लेकर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता था। लेकिन बचपन से ही वह शारीरिक रूप से मजबूत और एक्टिव थीं। हालांकि, पावरलिफ्टिंग को लेकर उनका कोई खास अनुभव नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे उनका रुझान इस खेल की तरफ बढ़ा।
पावरलिफ्टिंग में कदम रखना
आरती ने पावरलिफ्टिंग के प्रति अपनी रुचि को समझते हुए इसे एक पेशेवर खेल के रूप में अपनाया। पहले तो यह मुश्किल था, क्योंकि उन्हें तकनीकी ज्ञान और प्रशिक्षण की आवश्यकता थी। लेकिन उन्होंने किसी भी चुनौती का सामना करने की ठानी और अपने कोच से पावरलिफ्टिंग की बारीकियां सीखी।
कड़ी मेहनत और समर्पण
आरती ने अपनी दिनचर्या को इस तरह से बदला कि हर दिन पावरलिफ्टिंग की ट्रेनिंग में समय दे सकें। शुरू में उन्हें बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। निरंतर अभ्यास, सही आहार और मानसिक रूप से मजबूत होने के कारण उन्होंने अपनी ताकत को और बढ़ाया।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता
आरती ने पावरलिफ्टिंग में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें कई प्रतियोगिताओं में जीत दिलाई। उनकी सफलता ने न केवल उन्हें, बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस कराया।
समर्पण और प्रेरणा
आज आरती अरुण एक सफल पावरलिफ्टिंग चैंपियन हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष से यह साबित कर दिया कि कोई भी महिला किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकती है। उनकी कहानी आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है, खासकर महिलाओं को, जो खुद को साबित करना चाहती हैं।
आरती अरुण की कहानी यह सिखाती है कि मेहनत, समर्पण और सही दिशा में प्रयास से किसी भी सपने को पूरा किया जा सकता है। उनकी सफलता ने पावरलिफ्टिंग को और अधिक लोकप्रिय बनाया और यह दिखाया कि महिलाएं भी किसी भी खेल में शीर्ष पर पहुंच सकती हैं। उन्हें पावरलिफ्टिंग की दुनिया की मैरी कॉम कहते है। आरती आज तमिलनाडु स्टेट किकबॉक्सिंग एसोसिएशन की वाइस प्रेसिडेंट जैसी कई अहम जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं