97वें अकादमी अवॉर्ड्स के विजेताओं का ऐलान हो गया है। यह बहुप्रतिष्ठित ऑस्कर अवॉर्ड समारोह लॉस एंजिलिस के एक थिएटर में आयोजित हुआ था। हालांकि इस साल भारत की कोई भी फिल्म ऑस्कर के लिए नोमिनेटेड नहीं हुई, लेकिन इससे पहले कई भारतीयों को यह सम्मान मिल चुका है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की पहली महिला ऑस्कर विजेता कौन थी ?
चलिए हम आपको बताते है, भारत की पहली महिला ऑस्कर अवॉर्डी भानु अथैया (India’s first female Oscar winner) थीं, जिन्हें 1983 में फिल्म गांधी के लिए कॉस्ट्यूम डिज़ाइन का अवॉर्ड मिला था। उन्होंने यह अवॉर्ड ब्रिटिश डिज़ाइनर जॉन मॉलो के साथ शेयर किया था।
भानु अथैया कौन हैं?
भानु अथैया (Bhanu Athaiya) भारतीय सिनेमा की पहली महिला ऑस्कर अवॉर्डी हैं, जिन्होंने अपने अनोखे टैलेंट और समर्पण से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक नई पहचान बनाई। उन्होंने 1983 में आई फिल्म गांधी के लिए ‘बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर’ का ऑस्कर अवॉर्ड जीता। भानु अथैया ने भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग से लेकर आधुनिक युग तक फैले अपने करियर में बेहतरीन कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
भानु अथैया का जन्म 28 अप्रैल 1929 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कला और फैशन का शौक था। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से की, जहां उन्होंने पेंटिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। कला के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
संघर्ष की कहानी
अपने करियर की शुरुआत में भानु अथैया को कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। भानु ने गुरु दत्त की फिल्म सीआईडी (1956) के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की, जिससे उन्हें काफी सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने प्यासा (1957), साहिब बीबी और गुलाम (1962) जैसी प्रतिष्ठित फिल्मों के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन किए।
सफलता की ओर कदम
भानु अथैया की मेहनत रंग लाई जब उन्हें 1983 में रिचर्ड एटनबरो द्वारा निर्देशित फिल्म गांधी के लिए ऑस्कर अवॉर्ड मिला। इस फिल्म में महात्मा गांधी और अन्य पात्रों के परिधानों को यथार्थ रूप देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। यह पुरस्कार न केवल भानु अथैया के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण था।
महत्वपूर्ण योगदान
भानु अथैया ने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन किए। उनके उल्लेखनीय कामों में लगान (2001), स्वदेश (2004), लव स्टोरी (1981) और चांदनी (1989) जैसी फिल्में शामिल हैं।
व्यक्तिगत जीवन और विरासत
भानु अथैया का 15 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। उन्होंने अपनी आत्मकथा The Art of Costume Design में अपने जीवन और करियर की अनमोल यादों को साझा किया। उनकी बेटी ने उनकी विरासत को संजोए रखने का काम किया है। भानु अथैया का जीवन भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने साबित किया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।