कश्मीर, जो अपनी खूबसूरत वादियों और समृद्ध संस्कृति के लिए जाना जाता है, अब एक और वजह से सुर्खियों में है। इस बार कारण हैं कश्मीर की पहली महिला ट्रक ड्राइवर राबिया यासीन, जिन्होंने पारंपरिक बाधाओं को तोड़ते हुए एक नई मिसाल कायम की है।
कौन हैं कश्मीर की पहली महिला ट्रक ड्राइवर?
यह कहानी है एक साहसी महिला की राबिया यासीन, जिन्होंने समाज की रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए पुरुषों के वर्चस्व वाले ट्रकिंग क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उनका यह सफर आसान नहीं था, लेकिन अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी काम असंभव नहीं।
कैसे हुई इस सफर की शुरुआत?
कश्मीर में महिलाओं के लिए ट्रक ड्राइविंग कोई आम पेशा नहीं है। लेकिन इस युवा महिला ने जब पहली बार ट्रक चलाने की इच्छा जताई, तो उन्हें परिवार और समाज से कई तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं। हालांकि, उनके आत्मविश्वास और जज़्बे ने उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोका।
आ रही चुनौतियाँ और उनका सामना
समाज की मानसिकता – महिलाओं को ड्राइविंग, खासकर ट्रक जैसे भारी वाहनों को चलाने में अयोग्य माना जाता है।
प्रशिक्षण की कठिनाइयाँ – कश्मीर में ट्रक ड्राइविंग सिखाने वाली सुविधाएँ महिलाओं के लिए उपलब्ध नहीं थीं।
रोजगार के अवसर – एक महिला के लिए ट्रक ड्राइवर की नौकरी पाना और इसे स्थायी रूप से करना एक चुनौती है। लेकिन उन्होंने इन सबका डटकर सामना किया और समाज को यह दिखा दिया कि महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
क्या कहता है उनका अनुभव?
उनका कहना है कि शुरू में सफर आसान नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे लोगों की सोच बदली, उन्हें सहयोग भी मिलने लगा। अब वे कश्मीर में अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
उनकी यह यात्रा न केवल कश्मीर की महिलाओं के लिए बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि कोई भी महिला अगर अपने सपनों को पूरा करने की ठान ले, तो वह किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकती है।