भारतीय वायुसेना (IAF) में महिलाओं की भूमिका समय के साथ बढ़ी है, लेकिन पहली महिला पायलट के रूप में तनुष्का सिंह की कहानी एक प्रेरणादायक मिसाल है। उनके संघर्ष और सफलता की यात्रा ने कई युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है। यह लेख तनुष्का सिंह के जीवन, संघर्ष और सफलता की कहानी को विस्तार से प्रस्तुत करता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
तनुष्का सिंह का जन्म यूपी में हुआ था। बचपन से ही उन्हें उड़ानों और विमानों में गहरी रुचि थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा DPS MRPL स्कूल, सुरतकल से पूरी की और बाद में पीयू कॉलेज, मंगलुरु से एयरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक किया।
संघर्ष की शुरुआत
पायलट बनने के सपने को पूरा करने के लिए तनुष्का को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से हर बाधा को पार किया। तनुष्का ने भारतीय वायुसेना के कठिन चयन प्रक्रिया को पार करते हुए एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) में शानदार प्रदर्शन किया।
प्रशिक्षण और सफलता
IAF में चयन के बाद तनुष्का को हैदराबाद स्थित एयरफोर्स अकादमी में कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और 2025 में भारतीय वायुसेना की पहली महिला पायलट बनने का गौरव प्राप्त किया।
उपलब्धियां और प्रेरणा
तनुष्का सिंह ने न केवल पहली महिला पायलट के रूप में इतिहास रचा, बल्कि उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि आप में दृढ़ संकल्प और मेहनत करने की इच्छा है तो कोई भी सपना असंभव नहीं है।
तनुष्का सिंह की सफलता की कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। भारतीय वायुसेना में उनकी उपलब्धि महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और देश के लिए गर्व की बात है।