
कई बार हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जिन्हें बार-बार सोच कर हम अपना वर्तमान बर्बाद कर रहे होते हैं। पास्ट की इन यादों में खुद को रोके रखना कहां तक सही है। जो बीत गई उन बातों को या उन घटनाओं के बारे में सोच कर हम उन्हें ठीक नहीं कर सकते। हालांकि उनसे सबक लेकर हम आने वाले समय में ऐसी चीजों से सतर्क हो सकते हैं। अपने पास्ट से बाहर निकलना ही आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, और इससे बाहर निकलना बेहद जरूरी है।
तो आइयें जानते हैं उन 5 कारणों के बारें में, जो करेंगे आपकी मदद

खुद पर कंट्रोल करें
दुनिया ऐसे लोगों से भरी पड़ी है जो अपने अतीत के बारे में सोच-सोच कर अपने वर्तमान को खराब कर रहें हैं लेकिन ये समझने वाली बात तो यह है कि बीती बातों को सोच कर हम उसे सुधार नहीं सकते। हमें अपने वर्तमान में अपने विचारों पर, अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करना चाहिए।
खुद को कोसें नहीं
गलतियां किससे नहीं होती? लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बीती बातों के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हुए आप ख़ुद को ही धिक्कारने लगते हैं या खुद से ही नफरत करने लगते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक है। तो अगर जब भी ऐसी भावना आपके मन में आये तो अपनी कुछ अच्छी चीज़ों को याद करके ख़ुद से प्यार करने की कोशिश करें।
अपना बिहेवियर चेंज करें
अगर आप मानती हैं कि अतीत में जो हुआ उसकी ज़िम्मेदार आप हैं तो बेझिझक उसकी ज़िम्मेदारी लें और अपने व्यवहार में सुधार लाएं। किसी की दया का पात्र न बनें कि लोग आपके आंसू पोंछते रहें। अपने व्यवहार में सुधार करना कठिन काम ज़रूर हो सकता है, मगर नामुमक़िन नहीं, और ये सुधार आपकी ज़िंदगी बदल सकता है।
रिश्तों को चुनें
एक बार आपका रिश्ता टूट गया या ग़लत इंसान ज़िंदगी में आ गया तो इसका मतलब ये नहीं है कि दोबारा भी आपके साथ वही होगा। ग़लती हर किसी से होती है, ये बात मानकर चलें और अगली बार सोच समझकर किसी साथी को चुनेेंं। ऐसे लोगों के संपर्क में रहें जिनमें दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के लोग शामिल हैं, जो आपके ईमोशनल बैगेज को हल्का करने में आपकी मदद करें।
शर्मिंदगी को दूर करें
सबसे ज्यादा इमोशनल बोझ हम शर्मिंदगी की वजह से ही ढोते हैं और ये बात हम जानते भी हैं। लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे? इसकी परवाह न करें क्योंकि जो लोग आपसे प्यार करते हैं वे आपके अतीत के अधार पर आपका मूल्यांकन नहीं करेंगे, और जो ऐसा करते हैं उन्हें अपनी ज़िंदगी से निकाल दें। क्योंकि आपको घुट-घुटकर नहीं, सिर उठाकर जीना होगा।
