जब भी एक लड़की की शादी होती है, तो उसके घर वाले लड़की के लिए कई तरह की ज्वेलरी बनवाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें ऐसा लगता है की स्त्रीधन पर पति या ससुराल वालों का पूरा अधिकार होता है , लेकिन क्या आप जानते हैं, कि यह नियम के खिलाफ है। और इस बात को सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर दिया है कि शादी में महिला को मिले उपहार उसकी ‘निजी संपत्ति’ है और उस पर किसी और का हक नहीं है। आइये जानते है ,
क्या होता है स्त्रीधन?
दहेज और स्त्रीधन दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं। जहां दहेज लेना और देना, दोनों गैरकानूनी है, वहीं स्त्रीधन को कानूनन लिया और दिया जा सकता है। यह एक स्नेहमय उपहार होता है। यही वजह है कि इस पर महिला का पूरी तरह से अधिकार होता है और इसे कोई जबरदस्ती नहीं ले सकता।
किस कानून के तहत है यह अधिकार?
हिंदू महिला के लिए स्त्रीधन का हक हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 27 के तहत आता है। यह कानून शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद महिला को स्त्रीधन अपने पास रखने का पूरा हक देता है। अगर महिला चाहे तो स्त्रीधन को अपनी मर्जी से किसी को दे सकती है या बेच सकती है ।
स्त्रीधन का बेईमानी से दुरुपयोग
ध्यान रहें जितनी भी चीज महिला को मिली है, उन चीजों पर उसका पूरा अधिकार होता है। इसके अलावा महिला स्त्रीधन की संपूर्ण संपत्ति अपनी इच्छा अनुसार बेच सकती है या रख सकती है। इस पर उसे रोका नहीं जाएगा। कोर्ट के मुताबिक, अगर स्त्रीधन का बेईमानी से दुरुपयोग किया जाता है, तो यह एक अपराध होगा।
मृत्यु के बाद किसका होता है स्त्रीधन?
स्त्रीधन पर अपने जीवनकाल के दौरान महिला का कानूनी एकाधिकार होता है। लेकिन सवाल यह है कि उसकी मृत्यु के बाद स्त्रीधन किसे मिलेगा, यह उसकी वसीयत पर निर्भर करता है। अगर किसी महिला की मृत्यु वसीयत किए बगैर हो जाती है, तो उसकी स्त्रीधन वाली संपत्ति उसके उत्तराधिकारियों के बीच बंट जाएगी।
