Ruma Devi राजस्थान के बारमेर जिले की रहने वाली एक प्रतिभाशाली हस्तशिल्प डिज़ाइनर, सामाजिक कार्यकर्ता और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक हैं। उनका जीवन यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी लगन, हुनर और आत्मविश्वास से बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदल दी, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी खोला।
शुरुआती जीवन और संघर्ष
Ruma Devi का जन्म 1988 में राजस्थान के गाँव Rawatsar, बारमेर में हुआ। उनका बचपन साधारण और संघर्षपूर्ण था। बचपन में ही उन्होंने अपनी दादी से कढ़ाई और सिलाई का हुनर सीखा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए Ruma Devi की पढ़ाई आठवीं कक्षा तक ही सीमित रह गई।
छोटी उम्र में शादी हो गई और दुर्भाग्य से उनके पहले बच्चे का जन्म केवल 48 घंटे जीवित रहा। इस कठिन समय ने उन्हें टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के माध्यम से अपने जीवन में बदलाव लाना शुरू किया।
हुनर को व्यवसाय में बदलना
2006 में, Ruma Devi ने अपने गाँव की लगभग 10 महिलाओं को मनाकर एक छोटे समूह की शुरुआत की। प्रत्येक महिला ने 100 रुपये का योगदान दिया और उन्होंने सिलाई मशीन, कपड़ा और धागे जैसी बुनियादी सामग्री खरीदी। इस छोटे प्रयास के माध्यम से उन्होंने कुशन, हैंडबैग और छोटे होम डेकोर आइटम बनाना शुरू किया।
धीरे-धीरे यह प्रयास बड़ा रूप लेने लगा। 2008 में उन्होंने Gramin Vikas Evam Chetna Sansthan (GVCS) से जुड़कर ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करना शुरू किया। 2010 में, उन्होंने इस संगठन की अध्यक्षता संभाली और इसे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बनाया।
हस्तशिल्प को ग्लोबल मंच तक ले जाना
Ruma Devi ने पारंपरिक राजस्थान की कढ़ाई और अपलीके वर्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने अपने उत्पादों को दिल्ली के फैशन शो, राजस्थान हेरिटेज वीक और अन्य आयोजनों में प्रस्तुत किया। इस प्रयास से न केवल उनकी कला को सम्मान मिला, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने का अवसर मिला।
उनके काम के माध्यम से हजारों महिलाओं ने अपनी कला को रोजगार में बदला और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुईं। Ruma Devi ने यह साबित किया कि हुनर सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण का भी माध्यम बन सकता है।
सामाजिक कार्य और महिला सशक्तिकरण
Ruma Devi का काम केवल हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की स्वच्छता और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी कई पहल की।
- Akshara Scholarship Programme: गरीब और जरूरतमंद छात्रों, खासकर लड़कियों को उच्च शिक्षा और मेंटरशिप का अवसर प्रदान करना।
- ग्रामीण खेल और इंफ्रास्ट्रक्चर: बारमेर में पहला ग्रामीण मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया, जिससे युवा, विशेषकर लड़कियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खेलों में प्रशिक्षित किया जा सके।
- स्वास्थ्य और स्वच्छता: ग्रामीण महिलाओं में माहवारी स्वच्छता और सैनिटरी पैड वितरण के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना।
- सौर ऊर्जा परियोजना (Project Chirag): बिजली की कमी वाले इलाकों में सोलर लाइट्स का वितरण।
- आपदा और राहत कार्य: कोविड-19 के दौरान 16,500 परिवारों को सैनिटाइजिंग किट और 3,000 परिवारों को राशन किट उपलब्ध कराना, साथ ही 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ऑक्सीजन उपकरण देना।
इन पहलों के जरिए उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ आर्थिक स्वतंत्रता नहीं दी, बल्कि सामाजिक सम्मान और निर्णय लेने की शक्ति भी प्रदान की।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
- Ruma Devi के प्रयासों को भारत और विश्व स्तर पर मान्यता मिली:
- उन्हें 2018 में Nari Shakti Puraskar से सम्मानित किया गया, जो महिलाओं के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- उन्होंने Harvard University जैसे संस्थानों में महिला उद्यमिता और हस्तशिल्प जीवनयापन (artisan livelihoods) पर व्याख्यान दिया।
- उन्हें “Designer of the Year 2019” और Tribes India के Chief Designer और Brand Ambassador के रूप में सम्मानित किया गया।
Ruma Devi ने भारतीय टेलीविजन और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी कहानी साझा की, जैसे कि Indian Idol Women’s Day Special, और Kon Banega Crorepati में अपने अनुभवों को साझा किया।
इन सब सम्मान और मंचों ने उनके काम को और व्यापक रूप से उजागर किया और ग्रामीण महिलाओं की कहानियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
हुनर और सशक्तिकरण की सीख
Ruma Devi की कहानी यह स्पष्ट करती है कि हुनर और मेहनत मिलकर किसी भी व्यक्ति को जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उनके प्रयासों से:
- महिलाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की।
- समाज में उनका सम्मान बढ़ा और पारंपरिक बंदिशों को चुनौती मिली।
- हजारों परिवारों के जीवन में स्थायी बदलाव आया।
उन्होंने यह भी साबित किया कि शिक्षा की कमी या आर्थिक कठिनाइयाँ किसी की सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, यदि व्यक्ति में जुनून, साहस और सही दिशा हो।
Ruma Devi का जीवन संदेश देता है कि “छोटा प्रयास, बड़ा परिवर्तन” संभव है। अपने हुनर को पहचानना, उसे विकसित करना और दूसरों के साथ साझा करना न केवल व्यक्तिगत सफलता की कुंजी है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बन सकता है। Ruma Devi ने यह दिखाया कि हुनर + मेहनत + नेतृत्व से आप न केवल अपने जीवन को बदल सकते हैं, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा और अवसर भी बन सकते हैं। उनकी कहानी हर महिला और युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो अपने सपनों और हुनर के जरिए समाज और स्वयं का सशक्तिकरण करना चाहते हैं।
