आज की कामकाजी माँ कई भूमिकाओं में एक साथ जी रही है—ऑफिस की ज़िम्मेदारियाँ, घर की देखभाल और बच्चों की परवरिश। इस दोहरी भूमिका में सबसे बड़ी चुनौती होती है सही संतुलन बनाना। अक्सर महिलाएँ खुद से सवाल करती हैं—क्या मैं अपने बच्चे को पर्याप्त समय दे पा रही हूँ? क्या करियर चुनना गलत था? लेकिन सच्चाई यह है कि कामकाजी माँ होना कोई कमी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए एक प्रेरणा भी हो सकता है।

कामकाजी माँ के लिए सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि “परफेक्ट पैरेंट” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। बच्चों को हर समय नहीं, बल्कि क्वालिटी टाइम चाहिए। दिन में कुछ पल जब माँ पूरी तरह बच्चे के साथ हो—बिना मोबाइल, बिना जल्दबाज़ी—वही पल बच्चे के लिए सबसे मूल्यवान बन जाते हैं। एक साथ खाना खाना, सोने से पहले बात करना या छुट्टी के दिन कोई छोटी एक्टिविटी करना रिश्ते को मज़बूत बनाता है।
समय प्रबंधन इस संतुलन की रीढ़ है। दिन की प्राथमिकताएँ तय करना, ज़रूरी और गैर-ज़रूरी कामों में फर्क करना और खुद पर अनावश्यक दबाव न डालना बेहद ज़रूरी है। हर दिन सब कुछ परफेक्ट करना संभव नहीं, और इसे स्वीकार करना ही मानसिक सुकून देता है।
इसके साथ ही, कामकाजी माँ को मदद माँगने में संकोच नहीं करना चाहिए। पार्टनर, परिवार या विश्वसनीय सपोर्ट सिस्टम का सहयोग न सिर्फ़ बोझ कम करता है, बल्कि बच्चे को टीमवर्क और साझेदारी का महत्व भी सिखाता है। बच्चों के सामने यह दिखाना कि ज़िम्मेदारियाँ साझा की जाती हैं, उन्हें समानता का पाठ पढ़ाता है।

सबसे ज़्यादा अनदेखी जिस पहलू की होती है, वह है माँ की अपनी सेहत—शारीरिक और मानसिक। लगातार खुद को पीछे रखना थकान, अपराधबोध और चिड़चिड़ेपन को जन्म देता है। खुद के लिए थोड़ा समय निकालना, अपनी पसंद को ज़िंदा रखना और आराम करना कोई स्वार्थ नहीं है। एक खुश और संतुलित माँ ही एक खुश बच्चा पाल सकती है।
बच्चों से खुला संवाद भी बेहद अहम है। उन्हें यह समझाना कि माँ का काम करना ज़रूरी है और इसका मतलब प्यार में कमी नहीं है, उनके मन में भरोसा पैदा करता है। जब बच्चे माँ को आत्मनिर्भर, मेहनती और आत्मविश्वासी देखते हैं, तो वे अनजाने में वही मूल्य सीखते हैं।

आख़िर में, कामकाजी माँ और पैरेंटिंग के बीच संतुलन कोई तय फ़ॉर्मूला नहीं है। यह हर परिवार, हर बच्चे और हर माँ के लिए अलग होता है। ज़रूरत है खुद पर भरोसा रखने की, अपराधबोध छोड़ने की और यह समझने की कि आप जितना कर पा रही हैं—वही पर्याप्त है।
क्योंकि एक माँ का संतुलन ही पूरे परिवार की मजबूती बनता है।
