बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BIFFES) का 17वां संस्करण 29 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और इस बार यह फेस्टिवल केवल सिनेमा का उत्सव नहीं, बल्कि महिला अनुभवों, पहचान और सशक्तिकरण की एक सशक्त अभिव्यक्ति बनने जा रहा है। इस वर्ष BIFFES की थीम “Stree Endare Ashthe Saake”, जिसका अर्थ है “महिला जैसी वह है”, अपने आप में एक गहरी सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह थीम महिलाओं को किसी आदर्श, परिभाषा या अपेक्षा के दायरे में बांधने के बजाय उन्हें उनके वास्तविक रूप, अनुभवों और संघर्षों के साथ स्वीकार करने का संदेश देती है।
सिनेमा लंबे समय से समाज का आईना रहा है, लेकिन इस आईने में महिलाओं की छवि अक्सर अधूरी, सीमित या रूढ़ियों से बंधी दिखाई देती रही है। BIFFES 2026 की यह थीम इसी सोच को चुनौती देती है। यह फेस्टिवल महिलाओं को केवल कहानी की प्रेरणा के रूप में नहीं, बल्कि कहानी की निर्णायक आवाज़, रचनाकार और बदलाव की वाहक के रूप में सामने लाने का प्रयास करता है। “Stree Endare Ashthe Saake” यह कहता है कि महिला को समझने के लिए किसी अतिरिक्त व्याख्या की आवश्यकता नहीं—उसका अस्तित्व ही पर्याप्त है।
फेस्टिवल के दौरान दुनिया भर से चुनी गई ऐसी फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी, जो महिलाओं के जीवन के विविध पहलुओं को ईमानदारी और गहराई के साथ प्रस्तुत करती हैं। इन फिल्मों में महिला पात्र केवल सहायक भूमिका में नहीं होंगी, बल्कि उनकी इच्छाएँ, निर्णय, संघर्ष, असुरक्षाएँ और सफलताएँ कहानी के केंद्र में होंगी। यह चयन इस बात को दर्शाता है कि वैश्विक सिनेमा में महिला दृष्टिकोण अब हाशिए पर नहीं, बल्कि मुख्य धारा में अपनी जगह बना रहा है।
BIFFES 2026 की एक विशेष पहचान इसके पैनल डिस्कशन और मास्टरक्लासेस होंगी, जहाँ महिला फिल्ममेकर, लेखक, कलाकार और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स अपने अनुभव और विचार साझा करेंगी। ये सत्र केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों, अवसरों और नेतृत्व की भूमिका पर भी गहन संवाद को जन्म देंगे। यह मंच युवा महिलाओं के लिए सीखने, जुड़ने और प्रेरित होने का अवसर बनेगा।
फिल्म निर्माण के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी आज भी कई स्तरों पर असमानता का सामना करती है—चाहे वह निर्देशन हो, लेखन, सिनेमैटोग्राफी या निर्णय लेने वाले पद। BIFFES का यह संस्करण इस असमानता पर खुलकर बात करता है और यह संदेश देता है कि सिनेमा में समानता केवल स्क्रीन पर नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी ज़रूरी है। जब महिलाएँ कहानियाँ लिखती और निर्देशित करती हैं, तो वे केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक सोच को भी नया आयाम देती हैं।
यह फेस्टिवल इस बात को भी रेखांकित करता है कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल संघर्ष की कहानियाँ दिखाना नहीं है, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन, रिश्तों, सपनों और आत्मनिर्णय की उन कहानियों को भी सामने लाना है, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। “Stree Endare Ashthe Saake” महिलाओं को उनकी संपूर्णता में देखने का आग्रह करता है—न तो उन्हें आदर्श बनाकर, न ही कमजोर दिखाकर, बल्कि एक इंसान के रूप में।
BIFFES 2026 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के बीच एक सेतु का काम भी करेगा। अलग-अलग संस्कृतियों से आई महिला कहानियाँ यह साबित करेंगी कि भले ही भौगोलिक सीमाएँ अलग हों, लेकिन महिलाओं के अनुभवों में एक साझा भावनात्मक सच्चाई होती है। यह वैश्विक संवाद न केवल सिनेमा को समृद्ध करेगा, बल्कि महिलाओं की सामूहिक आवाज़ को भी मज़बूत बनाएगा।
अंततः, बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का यह संस्करण एक स्पष्ट संदेश देता है—महिलाएँ सिनेमा की कहानियों की केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि परिवर्तन की सशक्त आवाज़ हैं। BIFFES 2026 नारी दृष्टि, संवेदनशीलता और नेतृत्व का उत्सव है, जो यह साबित करता है कि जब महिलाओं को अपनी कहानियाँ खुद कहने का मंच मिलता है, तो सिनेमा सिर्फ़ कला नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम बन जाता है।
