आज के दौर में Equal Parenting, समान परवरिश और Co-Parenting in India जैसे शब्द तेजी से चर्चा में हैं। बदलती लाइफस्टाइल और वर्किंग पैरेंट्स की बढ़ती संख्या ने यह साफ कर दिया है कि बच्चों की परवरिश केवल मां की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। Parenting Responsibility तब प्रभावी बनती है, जब मां और पिता दोनों बराबरी से योगदान दें।

Equal Parenting क्या है?
समान परवरिश का सीधा मतलब है कि बच्चे की पढ़ाई, सेहत, विकास और अनुशासन में मां और पिता दोनों की बराबर भूमिका हो। इसमें यह नहीं देखा जाता कि कौन-सा काम किसका है, बल्कि घर और बाहर की जिम्मेदारियों को मिलकर संभाला जाता है। जब माता-पिता इस तरह संतुलन बनाते हैं, तो इससे उनका काम और परिवार दोनों बेहतर तरीके से चल पाते हैं।

Equal Parenting क्यों ज़रूरी है?
1. बच्चे का बेहतर विकास होता है
शोध बताते हैं कि जब मां और पिता दोनों बच्चे की ज़िंदगी में सक्रिय रहते हैं, तो बच्चे का भावनात्मक और मानसिक विकास बेहतर होता है। समान परवरिश से बच्चे आत्मनिर्भर बनते हैं और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
2. घर से ही बराबरी की सोच विकसित होती है
जब बच्चा देखता है कि पिता घर के काम और बच्चे की देखभाल में हाथ बंटा रहे हैं और मां काम से जुड़े फैसले ले रही हैं, तो उसके मन में यह समझ बनती है कि घर में सभी बराबर हैं। इससे समानता की सोच बचपन से ही मजबूत होती है।
3. कामकाजी मांओं पर दबाव कम होता है
समान परवरिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मां पर हर जिम्मेदारी का बोझ अकेले नहीं रहता। इससे उनका मानसिक और शारीरिक तनाव कम होता है और वे अपने करियर पर भी बेहतर ध्यान दे पाती हैं।
4. पिता और बच्चे का रिश्ता मज़बूत होता है
जब पिता केवल कमाने वाले की भूमिका तक सीमित न रहकर बच्चे की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल होते हैं, तो पिता और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव गहरा और मजबूत बनता है।

Equal Parenting कैसे अपनाएं?
स्वस्थ पैरेंटिंग रिश्ते के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि मां-पिता आपस में जिम्मेदारियों को लेकर खुलकर बात करें और सब कुछ पहले से साफ रखें। जिम्मेदारियों को बांटना भी उतना ही अहम है—चाहे वह स्कूल की मीटिंग हो, बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना हो या होमवर्क में मदद करना, ये सब काम मिल-जुलकर करने चाहिए। खुद उदाहरण बनें, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। इसलिए सकारात्मक व्यवहार और सही आदतें अपनाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है। आज के डिजिटल दौर में समान परवरिश का मतलब है कि बच्चों के मोबाइल, टीवी और इंटरनेट से जुड़ी आदतों पर मां-पिता दोनों बराबर ध्यान दें। बच्चों का स्क्रीन टाइम कितना हो, वे ऑनलाइन क्या देख रहे हैं और इंटरनेट कितना सुरक्षित है।
Equal Parenting और भविष्य
भारत में समान परवरिश आने वाली पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनाती है, बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत करती है और उनमें बराबरी की समझ विकसित करती है। यह केवल परिवार तक सीमित सोच नहीं है, बल्कि समाज को बेहतर दिशा में बदलने की एक अहम पहल है।
समान परवरिश यह सिखाती है कि मां और पिता अलग-अलग नहीं, बल्कि एक टीम की तरह साथ काम करते हैं। जब परवरिश साझेदारी बन जाती है, तो बच्चों का वर्तमान ही नहीं, उनका भविष्य भी ज्यादा मजबूत और सुरक्षित बनता है।
