हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां की देव परंपराएं, रहस्य और पौराणिक कहानियां सभी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहां कण-कण में देवी-देवताओं का वास माना जाता है और इसीलिए हिमाचल को ‘देवभूमि’ भी कहा जाता है। यहां मंडी जिले के करसोग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शराणी श्रेओ गांव में ऐसा चमत्कारी मंदिर है जिसकी कहानी सुन कर आप भी दंग रह जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि दाद-खाज, खुजली व किसी भी तरह के चर्मरोग व अन्य बिमारियों से परेशान हैं तो एक बार जरूर माता जोगणी के दरबार पहुंचे। जोगणी माता अपने चमत्कारों से लोगों के चर्म रोगों का अंत कर देती हैं।इसलिए इन्हें बीमारी का नाश करने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। लोगों का दावा है कि माता जोगणी के दर पर ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनको बड़े-बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों के पास से निराशा हाथ लगती है। इसलिए स्थानीय लोग इन्हें बीमारी का नाश करने वाली माता के नाम से जानते हैं। माता के दरबार में दूर-दूर से लोग अपनी बीमारी का इलाज ढूंढते हुए पहुंचते हैं।
गांव के बुजुर्गो का कहना है कि सदियों पहले इस इलाके में महामारी फैली थी इस भयंकर बीमारी की चपेट में आने से हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इलाके के जाने-माने वैद्य भी बीमारी पर काबू पाने में नाकामयाब रहे। उस समय यहां माहूंनाग काकनो ने जोगणी माता को बीमारी पर काबू पाने के लिए प्रकट किया था। माता की चमत्कारिक शक्तियों से बीमारी कुछ ही दिनों में दूर हो गई। जिसके बाद नाग देवता ने माता जोगणी को अपने साथ रहने के लिए कहा, लेकिन जोगणी माता ने शराणीश्रेयो में छोटी सी पहाड़ी पर एक बड़े पत्थर के नीचे बनी छोटी सी गुफा को रहने के लिए चुना।
भोग के लिए आते हैं कौव
मंदिर के पास कौओं की तादाद माता के प्रसन्न होने का प्रतीक माना जाता है। लोगों की मानें तो इस इलाके में दूर-दूर तक कौवो का कोई नामो निशान नहीं दिखता, लेकिन माता को प्रसाद चढ़ाने वाले दिन कौवों की ये तादाद सबको हैरान कर देती है। यानि स्थानीय लोग इन कौवों को माता जोगणी देवी का दूत मानते हैं और माता को भोग लगाने के बाद कौवों को भी प्रसाद चढ़ाते हैं।
