हर महिला के भीतर कोई न कोई खास हुनर छुपा होता है—कभी वह बचपन के सपनों में दब जाता है, तो कभी जिम्मेदारियों के बोझ तले। समाज अक्सर महिलाओं की पहचान उनके रिश्तों और भूमिकाओं से तय करता है, लेकिन सच यह है कि हर महिला अपने आप में एक रचनात्मक, सक्षम और संभावनाओं से भरी दुनिया है। ज़रूरत है तो बस उस हुनर को पहचानने और उसे निखारने की।

अक्सर महिलाएँ अपने हुनर को “शौक़” कहकर टाल देती हैं—कभी समय की कमी के कारण, तो कभी आत्मविश्वास की कमी के कारण। लेकिन यही शौक़ आगे चलकर आत्मनिर्भरता, संतोष और पहचान का माध्यम बन सकता है। लेखन, कला, सिलाई, कुकिंग, डिज़ाइनिंग, शिक्षण, डिजिटल स्किल्स या नेतृत्व—हुनर के रूप अनगिनत हैं, बस उन्हें महत्व देने की ज़रूरत है।
हुनर पहचानने की शुरुआत खुद से सवाल पूछने से होती है—वह कौन सा काम है जिसे करते हुए थकान महसूस नहीं होती? कौन सा काम है जिसकी तारीफ़ सबसे ज़्यादा मिलती है? कई बार दूसरों की नज़र से भी अपने हुनर को पहचानना आसान हो जाता है। परिवार और दोस्तों से मिले छोटे-छोटे प्रोत्साहन आत्मविश्वास को मजबूत करते हैं।

हुनर को निखारने के लिए निरंतर अभ्यास, सीखने की इच्छा और धैर्य ज़रूरी है। आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन कोर्स, सोशल मीडिया और प्लेटफ़ॉर्म्स ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं। घर की चारदीवारी से बाहर निकले बिना भी महिलाएँ अपने हुनर को पहचान दिला सकती हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।
सबसे अहम बात यह है कि महिला खुद पर भरोसा करे। उम्र, परिस्थितियाँ या बीता हुआ समय कभी भी नई शुरुआत में बाधा नहीं बनते। जब एक महिला अपने हुनर को पहचानती है और उसे अपनाती है, तो वह सिर्फ़ खुद को नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी प्रेरित करती है।

हर महिला में छुपा हुनर सिर्फ़ उसकी क्षमता नहीं, उसकी पहचान है। ज़रूरत है तो बस उस पहचान को अपनाने की, उसे संवारने की और दुनिया को दिखाने की—क्योंकि जब महिलाएँ आगे बढ़ती हैं, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है।
