महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक दायित्व है। इसी भावना को सशक्त रूप देने के उद्देश्य से लखनऊ के आलमबाग स्थित वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वन स्टॉप सेंटर और अदीरा – पिंक इज़ पावरफुल के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जहाँ समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर एक साझा संदेश दिया गया—सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण का।

कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, उपलब्ध सहायता प्रणालियों और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि जब तक समाज के प्रत्येक वर्ग को कानून और अधिकारों की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक अपराधों पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं लखनऊ हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता अंचल गुप्ता। उन्होंने महिलाओं और बच्चों से जुड़े विभिन्न कानूनों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि आज भी बड़ी संख्या में पीड़ित अपने अधिकारों से अनभिज्ञ रहते हैं, जिसका लाभ अपराधी उठाते हैं। उन्होंने मानव तस्करी को एक संगठित और जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ कानून मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता तभी सुनिश्चित होगी जब जागरूकता, त्वरित कानूनी कार्रवाई और सामाजिक सहयोग साथ-साथ काम करें।

कार्यक्रम में चौकी प्रभारी एसआई शालिनी सोनकर ने महिलाओं की सुरक्षा में पुलिस की बदलती और सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज पुलिस केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा, परामर्श और न्याय दिलाने के लिए हर संभव सहयोग कर रही है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि किसी भी प्रकार की हिंसा, शोषण या तस्करी की आशंका होने पर बिना भय के सामने आएँ और कानून का सहारा लें।
वन स्टॉप सेंटर की इंचार्ज अर्चना सिंह ने केंद्र की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल है, जहाँ कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग, अस्थायी आवास और पुनर्वास जैसी सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए यह केंद्र जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन सकता है।

कार्यक्रम की विशेष उपस्थिति रहीं अदीरा – पिंक इज़ पावरफुल की संस्थापिका रितिका चौधरी। उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी अभियान की सफलता तभी संभव है, जब समाज स्वयं जागरूक और संवेदनशील बने। उन्होंने कहा, “पिंक इज़ पावरफुल केवल एक नारा नहीं, बल्कि नारी की आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।”
विज्ञान फाउंडेशन की संस्थापिका एवं समाजसेविका सुनीता ने जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी अक्सर गरीबी, अशिक्षा और जानकारी के अभाव का परिणाम होती है। ऐसे में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी इस अपराध को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। समय पर की गई पहल, संवेदनशील दृष्टिकोण और सामूहिक प्रयास ही मानव तस्करी जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगा सकते हैं।
यह जागरूकता कार्यक्रम न केवल जानकारी प्रदान करने वाला था, बल्कि समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करने वाला भी रहा। सुरक्षित नारी, सुरक्षित बचपन और जागरूक समाज ही एक सशक्त, संवेदनशील और प्रगतिशील राष्ट्र की मजबूत नींव होते हैं—और यही इस कार्यक्रम का मूल संदेश रहा।
