अच्छे माँ बाप बनना: कुछ बच्चे अपने पेरेंट्स की बात नहीं सुनते हैं और जिद कर के हर काम करवा लेते हैं। कोई भी पैरेंट ये नहीं चाहतें कि उनके बच्चे लापरवाह रहे, वे हर वो प्रयास करते हैं जिससे उनका बच्चा जिम्मेदार बन जाए। लेकिन कुछ ऐसी चूक हो जाती है जिसकी वजह से वे बच्चे में सुधार नहीं कर पाते!
आइए जानते हैं कि हम कुछ आसान तरकीब, जिससे आप अपने जिद्दी और लापरवाह बच्चों के व्यवहार में सुधार कर सकते हैं।
सख्त न बनें-

कुछ माता-पिता अपने बच्चों को अनुशासित रखते हैं, ताकि उनकी आदतों में सुधार ला सके। इसके लिए वे बहुत सख्त हो जाते है। कभी-कभी उनका सख्त इतना बढ़ जाता है जिससे बच्चों के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ने लगता है इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को छोटी-छोटी गलतियों पर ज्यादा सख्त सजा न दें।
तुलना करने से बचें-

अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की तुलना उनके दोस्तों से या फिर रिश्तेदारों के बच्चों से करने लग जाते हैं, अगर आप भी यह गलती कर हैं तो इस आदत को छोड़ दें। भले ही आप तुलना अच्छे के लिए ही क्यों न कर रहे हों, अधिकतर बच्चों को दूसरों के साथ की गई तुलना बिल्कुल पसंद नहीं होती है। ऐसे में वे काफी ज्यादा जिद्दी और लापरवाह भी हो सकते हैं। ऐसे में अगर आप अपने बच्चों को जिम्मेदार बनाना चाहते हैं तो उन्हें प्यार से समझाने की कोशिश करें।
बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं-

अक्सर माता-पिता अपने बच्चो को बिलकुल भी समय नहीं दे पातें। इसकी कई वजह हो सकती हैं, या तो वे जॉब कर रहें होते हैं या वे अपनी लाइफ में इतना बिजी होते हैं की वे अपने बच्चो की केयर करना भूल ही जाते हैं। तो ऐसी गलती भूल कर भी न करे। अपने बच्चो को ज्यादा से ज्यादा समय दे।
बाउंड्री लाइन सेट करें-

बढ़ती उम्र के साथ बच्चा धीरे-धीरे पैरेंट्स की हर बात का जवाब देने लगता है, ऐसे में आप उससे हर बात पर बहस करने की बजाय शांत रहे। अगर आप भी बहस करते हैं तो इससे बात और भी बढ़ सकती है। ज्यादा बहस करने से आपका बच्चा चिड़चिड़ा और जिद्दी हो सकता है। मेरा मानना है कि बच्चों से बहस करने की बजाय हमें अपने और उनके बीच एक बाउंड्री लाइन तय करनी चाहिये।
बच्चों की तारीफ करें-

जब भी आपके बच्चे छोटा-सा भी काम खुद से करें तो ऐसे में आप उनकी तारीफ करें। ये सोचना बिलकुल गलत है, कि तारीफ करने से बच्चे बिगड़ जाते हैं। बल्कि सच तो यह है कि तारीफ करने से बच्चे और भी जिम्मेदारी उठाने के लिए प्रेरित होते हैं और साथ ही उनमें और भी काबिल बनने की इच्छा उत्पन्न होती है।
