कभी घर के शांत कोनों में कागज़ की पतली पट्टियों और साधारण मिट्टी के साथ शुरू हुआ एक छोटा-सा शौक आज एक पहचान बन चुका है। यह कहानी है इशिता की—एक ऐसी महिला की, जिन्होंने गृहिणी की जिम्मेदारियों के बीच अपने भीतर छिपी रचनात्मकता को पहचाना और उसे एक सफल ब्रांड में बदल दिया।
घर की दुनिया से कला की उड़ान तक
कई वर्षों तक इशिता की दुनिया घर की जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन इस व्यस्त दिनचर्या के पीछे एक रचनात्मक चिंगारी लगातार जलती रही। क्विलिंग के जरिए कागज़ को जीवंत आकृतियों में बदलना और साधारण मिट्टी से सुंदर आभूषण बनाना उनके लिए शुरुआत में सिर्फ एक शौक था।
धीरे-धीरे यही शौक एक पहचान बन गया और जन्म हुआ उनके ब्रांड Crafteria का—जो आज customized home-made art और jewellery के लिए जाना जाता है।

बारीकी में बसती है उनकी कला
इशिता का काम केवल सजावट नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उनके बनाए quilled दुर्गा माँ के चित्र हजारों पेपर कॉइल्स से तैयार होते हैं, जिनमें दिव्यता और बारीकी साफ झलकती है।
इसके साथ-साथ उनकी hand-painted clay jewellery और mixed-media home decor भारतीय संस्कृति की रंगीन झलक प्रस्तुत करते हैं—चाहे वह शिव-पार्वती की मूर्तियां हों या प्रकृति से प्रेरित quilled art.

शौक से उद्यमिता की ओर कदम
इशिता के लिए सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें एहसास हुआ कि इतनी सूक्ष्म कला को एक बड़ा मंच मिलना चाहिए। उन्होंने साहस के साथ अपने शौक को व्यवसाय में बदल दिया।
आज उनका ब्रांड कस्टम home-decor, statement jewellery और school projects तक के विशेष ऑर्डर तैयार करता है। उनकी यात्रा हर महिला के लिए प्रेरणा है—यह बताती है कि ‘गृहिणी’ होना अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का आधार है।
इशिता कहती हैं:
“मैंने पहले एक घर को आकार दिया था, अब अपनी कला से अपनी पहचान गढ़ रही हूँ।”

मिशन: कला से आत्मविश्वास तक
इशिता का उद्देश्य केवल सुंदर वस्तुएं बनाना नहीं, बल्कि महिलाओं को प्रेरित करना है कि वे अपने छिपे हुए हुनर को पहचानें। उनका मानना है कि धैर्य और जुनून के साथ साधारण सामग्री भी एक विरासत बन सकती है।
उपलब्धियां एक नजर में
- Crafteria की संस्थापक—एक उभरता हस्तशिल्प ब्रांड
- पारंपरिक देवी-देवताओं को आधुनिक quilling और clay technique से नया रूप देना
- शौक को सफल व्यवसाय में बदलने का प्रेरक उदाहरण
इशिता सिन्हा की कहानी हमें सिखाती है—हर महिला के भीतर एक “second bloom” छिपा होती है, बस उसे पहचानने और आगे बढ़ाने का साहस चाहिए।
