राजस्थान के फलोदी क्षेत्र से सामने आई यह कहानी साबित करती है कि सही सरकारी योजना और अवसर मिल जाए, तो ग्रामीण महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की मिसाल बन सकती हैं। पापू देवी नाम की एक साधारण ग्रामीण महिला, जो कभी केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, आज प्रधानमंत्री कुसुम (PM-KUSUM) योजना के तहत अपना खुद का सोलर पावर प्लांट चला रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं।
इस प्रेरक परिवर्तन की कहानी को आईएएस अधिकारी आरती डोगरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। उन्होंने बताया कि पहली बार उनकी मुलाकात पापू देवी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांसवाड़ा दौरे के दौरान हुई थी, जहाँ पापू देवी ने बताया था कि किस तरह सौर ऊर्जा ने उनकी आजीविका को नया रास्ता दिया है। कुछ समय बाद जब आरती डोगरा दोबारा पापू देवी से मिलीं, तो यह मुलाकात उनके कार्यालय में हुई—जहाँ पापू देवी आत्मविश्वास के साथ ‘लोड’, ‘जीएसएस’ और ‘ट्रिपिंग’ जैसे तकनीकी शब्दों पर चर्चा कर रही थीं।

आरती डोगरा ने इस बदलाव को बेहद खास बताते हुए लिखा कि ग्रामीण राजस्थान में एक महिला का घरेलू भूमिका से उद्यमिता तक का यह सफर दिखाता है कि सशक्तिकरण कभी-कभी कितनी शांति और मजबूती से अपनी जड़ें जमा लेता है। उन्होंने पापू देवी के साथ कार्यालय में ली गई तस्वीर और एक पुराना वीडियो भी साझा किया, जिसमें पापू देवी सोलर प्लांट के ज़रिए मिली आर्थिक आज़ादी और सामाजिक पहचान के बारे में बात करती नजर आती हैं।
पापू देवी की कहानी केवल एक महिला की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक है जो विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा और सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण भारत में देखने को मिल रहा है। यह कहानी बताती है कि महिलाएँ अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की उद्यमी भी बन रही हैं। पीएम-कुसुम जैसी योजनाएँ न सिर्फ़ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।
यह उदाहरण साबित करता है कि जब नीति, तकनीक और महिला शक्ति एक साथ आती हैं, तो न केवल ज़िंदगियाँ बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज का भविष्य भी रोशन हो जाता है।
