प्रिय पाठिकाओं
नमस्कार
हर दौर की अपनी एक सच्चाई होती है, और आज की सच्चाई है बदलती हुई महिला — जो सवाल भी करती है, फैसले भी लेती है और अपनी पहचान खुद गढ़ रही है। गर्व और खुशी के साथ हम इस अंक में लेकर आए हैं ऐसे विषय, जो आज की महिला के जीवन को सीधे तौर पर छूते हैं- चाहे बात रिश्तों की अहमियत की हो, खुद की पहचान तलाशने की हो या बदलती लाइफस्टाइल की नई परिभाषाओं को समझने की।
इस अंक में हम बात कर रहे हैं “क्या सिर्फ प्यार काफी है?” जैसे अहम सवाल की, जहां रिश्तों की सच्चाई को समझने की कोशिश है। वहीं “मां जैसी बनना चाहती थी, बस वो अधूरी पहचान” और “मॉम गिल्ट” जैसे विषय हर उस महिला की आवाज हैं, जो परिवार और खुद के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद में है। मदर्स डे पर खास कॉलम “मां का खत… बेटी के लिए” आपको भावनाओं की एक गहरी यात्रा पर ले जाएगा। समाज और अधिकारों की बात करें तो “पीरियड लीव मुद्दा अधिकार का” एक जरूरी बहस को सामने लाता है।
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