गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। इस दौरान शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया एक गंभीर समस्या बन सकती है। गंभीर एनीमिया होने पर प्रसव के समय जटिलताओं और मातृ मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को आयरन का इंजेक्शन देने की नई पहल शुरू की गई है।
उत्तर प्रदेश में शुरू हुई आयरन इंजेक्शन की पहल
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया से निपटने के लिए Ferric Carboxymaltose (FCM) नामक आयरन इंजेक्शन की पहल शुरू की है। इससे पहले पांच जिलों—सीतापुर, हरदोई, रायबरेली, जालौन और बहराइच में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 20 हजार से अधिक डोज दी गईं।
इस पहल का उद्देश्य उन महिलाओं को उपचार उपलब्ध कराना है, जिन्हें आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लेने में परेशानी होती है या जिनके हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार की जरूरत होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर गर्भवती महिला को आयरन इंजेक्शन लगवाना जरूरी है।
क्या हर महीने आयरन इंजेक्शन लगवाना जरूरी है?
नहीं, गर्भावस्था में हर महीने आयरन इंजेक्शन लगवाना सभी महिलाओं के लिए जरूरी नहीं है। उपचार का तरीका महिला के हीमोग्लोबिन स्तर, आयरन की कमी, गर्भावस्था के चरण और उसकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय किया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) गर्भावस्था में एनीमिया से बचाव के लिए नियमित रूप से आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेने की सलाह देता है। वहीं, जिन महिलाओं में आयरन की कमी से एनीमिया हो और गोलियों से पर्याप्त फायदा न मिले, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर नस के जरिए आयरन दिया जा सकता है।
Ferric Carboxymaltose की खासियत यह है कि निर्धारित आयरन की जरूरत के अनुसार कुछ मरीजों को एक ही सिटिंग में पर्याप्त डोज दी जा सकती है। लेकिन कितनी डोज और कब दी जानी है, यह डॉक्टर तय करते हैं। इसे हर महीने अपने आप दोहराना सही नहीं है।
गर्भावस्था में एनीमिया के लक्षण क्या हैं?
गर्भावस्था में खून की कमी होने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
- लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना।
- चक्कर आना या सिरदर्द होना।
- सांस फूलना, खासकर थोड़ी मेहनत करने पर।
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना।
- त्वचा का पीला दिखाई देना।
ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर एनीमिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए हीमोग्लोबिन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य जांच जरूरी हैं।
मां और बच्चे के लिए क्यों खतरनाक है एनीमिया?
गर्भावस्था में गंभीर एनीमिया होने से मां के शरीर की खून की कमी और प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव को सहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे प्रसव संबंधी जटिलताओं और गंभीर मामलों में मां की जान को खतरा हो सकता है।
बच्चे पर भी इसका असर पड़ सकता है। आयरन की कमी और एनीमिया का संबंध समय से पहले जन्म, कम वजन वाले बच्चे के जन्म और अन्य प्रतिकूल परिणामों से पाया गया है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं। <Cite refs=
एनीमिया से बचाव के लिए क्या करें?
गर्भावस्था के दौरान नियमित प्रसव-पूर्व जांच करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार हीमोग्लोबिन की जांच कराएं। आयरन और फोलिक एसिड की निर्धारित गोलियां नियमित रूप से लें। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, बीन्स और आयरन से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ शामिल करें। विटामिन C से भरपूर फल और सब्जियां आयरन के अवशोषण में मदद कर सकती हैं।
यदि गोलियां लेने से परेशानी होती है या हीमोग्लोबिन का स्तर नहीं बढ़ रहा है, तो डॉक्टर को जरूर बताएं। जरूरत के अनुसार डॉक्टर अन्य उपचार का विकल्प चुन सकते हैं। आयरन इंजेक्शन हमेशा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में ही लगवाना चाहिए, क्योंकि इससे कभी-कभी एलर्जी या अन्य गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है।
सही समय पर इलाज है जरूरी
गर्भावस्था में एनीमिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही खानपान और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार से मां और बच्चे की सेहत की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। आयरन इंजेक्शन कुछ महिलाओं के लिए उपयोगी उपचार हो सकता है, लेकिन यह हर गर्भवती महिला के लिए जरूरी नहीं है।
याद रखें: गर्भावस्था में आयरन इंजेक्शन की जरूरत और उसकी डोज का फैसला जांच और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही होना चाहिए।
