नया साल हमेशा एक नई शुरुआत, नई उम्मीदों और आत्मचिंतन का अवसर लेकर आता है। जनवरी की ठंडी सुबहों की तरह यह समय भी हमें ठहरकर खुद को महसूस करने, पुराने अनुभवों से सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अदीरा का यह नया अंक इसी नई शुरुआत की सौम्य लेकिन सशक्त भावना के साथ आपके हाथों में है।
इस अंक में ‘सर्दियों में शॉल से संवरता रॉयल विंटर लुक’ हो या ‘खुद से किए गए ऐसे समझदार संकल्प जो बोझ नहीं बनते’, हर विषय आपको अपने भीतर झांकने और खुद को नए सिरे से गढ़ने का संदेश देता है। इसी क्रम में “जवाब न देकर सारे जवाब दे दीजिए” और “तोड़ दीजिए सोच की बेड़ियां” जैसे विषय हमें सिखाते हैं कि हर सवाल का उत्तर शब्दों में देना ज़रूरी नहीं होता।
जनवरी का महीना अपने साथ कई अर्थपूर्ण दिन और गहरे विचार लेकर आता है। सावित्रीबाई फुले जयंती से लेकर राष्ट्रीय युवा दिवस, राष्ट्रीय बालिका दिवस और राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस तक, यह अंक हमें समाज के संवेदनशील लेकिन अत्यंत आवश्यक मुद्दों पर सोचने और जागरूक होने का अवसर देता है।
संस्कृति और उत्सव के रंग भी इस अंक में सजीव रूप से बिखरे हैं। अदीरा द्वारा प्रस्तुत ‘रिवायत’ संस्कृति, साहित्य और नारी शक्ति के सार्थक संगम से पाठकों को रूबरू कराता है। वहीं ‘धागों से बंधे रिश्ते’ की कहानी मां-बेटे के रिश्ते में परंपरा और आधुनिकता की संवेदनशील झलक प्रस्तुत करती है।
इस अनवरत यात्रा में हमारे साथ जुड़े रहने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। आप इन विषयों के बारे में क्या सोचती हैं? अगले अंक में आप किन मुद्दों को पढ़ना चाहेंगी? आपके मन में भी कोई कविता, कोई कहानी या कोई अनुभव है जिसे आप शब्दों में ढालना चाहती हों तो अदीरा आपके शब्दों का मंच बनने के लिए तैयार है। हमें मेल करें aapkiadira@gmail.com या व्हाट्सएप करें- 9116200518। आपके जज्बात, आपके शब्द अब सब तक पहुंचेंगे अदीरा के साथ।
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