सर्दियों का मौसम आते ही दिनचर्या अपने आप बदलने लगती है। सुबह देर से निकलती धूप, हल्की-सी ठंडक, कोहरे में लिपटी सड़कें और शाम ढलते ही ठिठुरन—इन सबके बीच अगर कोई चीज़ सबसे ज़्यादा सुकून देती है, तो वह है एक कप गरम-गरम कड़क मसाला चाय। भारतीय घरों में सर्दियों के मौसम में चाय सिर्फ आदत नहीं रहती, बल्कि ज़रूरत बन जाती है। यही वजह है कि ठंड बढ़ते ही रसोई में चाय की केतली ज़्यादा बार चढ़ने लगती है।
हालांकि, बहुत से लोग यह शिकायत करते हैं कि घर पर बनाई गई चाय में वह स्वाद नहीं आता, जो बाहर की चाय या पुराने ज़माने की दादी-नानी के हाथ की चाय में होता था। कभी चाय हल्की रह जाती है, कभी कड़वी हो जाती है और कभी उसमें मसालों की खुशबू ही नहीं आती। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है चाय बनाने का गलत क्रम। खासकर यह सवाल लगभग हर घर में उठता है—मसाला चाय बनाते समय पहले अदरक डालें या पहले चाय पत्ती?
चाय के स्वाद के पीछे छिपा पारंपरिक ज्ञान

अगर हम थोड़ा पीछे देखें, तो भारतीय रसोई में मसाला चाय सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए बनाई जाती थी। पुराने समय में सर्दियों के मौसम में अदरक, काली मिर्च, लौंग और दालचीनी का इस्तेमाल इसलिए किया जाता था ताकि शरीर ठंड से सुरक्षित रहे। उस समय चाय बनाने का तरीका भी आज से अलग था। चाय को सिर्फ दूध-पानी में उबालने की बजाय पहले मसालों को पानी में पकाया जाता था।
परंपरागत तौर पर माना जाता है कि अदरक और मसालों को उबलते पानी में समय मिलना चाहिए, ताकि उनका अर्क पूरी तरह निकल सके। यही वजह है कि सही और परफेक्ट मसाला चाय बनाने के लिए पहले अदरक और मसाले डाले जाते हैं, उसके बाद चाय पत्ती। इस क्रम से बनी चाय न सिर्फ ज़्यादा खुशबूदार होती है, बल्कि सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म भी रखती है।
सर्दियों में सही क्रम क्यों है ज़रूरी?
ठंड के मौसम में शरीर की पाचन क्षमता थोड़ी धीमी हो जाती है और सर्दी-जुकाम का खतरा भी बढ़ जाता है। अदरक और मसाले तभी असर दिखाते हैं, जब उन्हें ठीक से पकाया जाए। अगर चाय पत्ती पहले डाल दी जाए, तो मसालों को उबलने का पूरा मौका नहीं मिलता और चाय का स्वाद अधूरा रह जाता है। वहीं सही क्रम अपनाने से चाय का रंग गहरा आता है, स्वाद संतुलित रहता है और कड़वाहट भी नहीं आती।
सर्दियों के लिए कड़क मसाला चाय की परफेक्ट रेसिपी

सर्दियों में कड़क मसाला चाय बनाने के लिए बहुत ज़्यादा सामग्री की ज़रूरत नहीं होती, बस सही मात्रा और थोड़ा धैर्य चाहिए। दो कप चाय के लिए डेढ़ कप पानी पैन में डालें और गैस पर रखें। पानी हल्का गर्म होते ही उसमें एक इंच कद्दूकस किया हुआ ताज़ा अदरक डालें। इसके साथ दो कुटी हुई इलायची, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, दो लौंग और दो से तीन हल्की कुटी हुई काली मिर्च डालें।
अब इस पानी को मध्यम आंच पर तीन से चार मिनट तक उबलने दें। इस दौरान मसालों की खुशबू पूरे किचन में फैलने लगेगी। यही संकेत है कि मसालों का अर्क पानी में उतर चुका है। इसके बाद इसमें दो छोटी चम्मच अच्छी क्वालिटी की चाय पत्ती डालें और एक से दो मिनट तक पकने दें।
अब आधा कप दूध और स्वादानुसार चीनी डालें। चाय को धीमी आंच पर दो से तीन मिनट तक पकने दें। जब चाय का रंग गहरा हो जाए और उसमें कड़कपन नज़र आने लगे, तब गैस बंद कर दें और चाय छान लें। इस तरह बनी चाय न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि ठंड के मौसम में शरीर को तुरंत गर्माहट भी देती है।
ढाबे जैसी चाय का स्वाद पाने के आसान तरीके
अगर आप सर्दियों में ढाबे जैसी कड़क चाय का मज़ा लेना चाहते हैं, तो मसालों को हमेशा ताज़ा कूटकर डालें। पहले से पिसे मसाले खुशबू कम कर देते हैं। अदरक की मात्रा संतुलित रखें, ताकि चाय ज़्यादा तीखी न हो। चाय को ज़रूरत से ज़्यादा देर तक उबालने से कड़वाहट बढ़ जाती है, इसलिए सही समय पर गैस बंद करना बेहद ज़रूरी है। दूध हमेशा चाय पत्ती के बाद डालें, ताकि चाय हल्की न पड़े।
सर्दियों में मसाला चाय क्यों है सबसे भरोसेमंद पेय?

सर्दियों के मौसम में मसाला चाय सिर्फ स्वाद का आनंद नहीं देती, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी फायदेमंद मानी जाती है। अदरक सर्दी-जुकाम और गले की खराश से राहत देता है। काली मिर्च और लौंग शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं, जबकि इलायची पाचन को बेहतर बनाती है। यही वजह है कि ठंड के मौसम में सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान—मसाला चाय हर समय काम आती है।
निष्कर्ष

सर्दियों के मौसम के उपलक्ष्य में अगर आप ऐसी चाय बनाना चाहते हैं, जो स्वाद में भी बेहतरीन हो और शरीर को भी गर्म रखे, तो सही तरीके को अपनाना ज़रूरी है।
याद रखें—पहले अदरक और मसाले, फिर चाय पत्ती और अंत में दूध।
यही छोटा-सा नियम आपकी मसाला चाय को साधारण से खास बना देगा।
