आज के दौर में “healthy” खाने की बात तो हर कोई करता है, लेकिन जब बात स्वाद की आती है, तो ज़्यादातर लोग समझौता कर लेते हैं। हमें लगता है कि जो चीज़ हेल्दी है, वह स्वादिष्ट नहीं हो सकती — और जो स्वादिष्ट है, वह सेहत के लिए नुकसानदायक ही होगी। इसी सोच को बदलने का काम कर रही हैं श्वेता बैजल सिंह, जिनकी पहल “Gut Feeling”- The Wholesome Wellness न सिर्फ एक ब्रांड है बल्कि एक जीवन-दृष्टि भी है।
यह कहानी सिर्फ एक महिला उद्यमी की नहीं है, बल्कि उस सोच की है जो हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य और स्वाद एक साथ चल सकते हैं।

जब समस्या बनी समाधान की शुरुआत
श्वेता की यात्रा किसी बिज़नेस प्लान या मार्केट रिसर्च से शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत हुई घर से — एक निजी परेशानी से। उनके परिवार में कई लोगों को पेट और पाचन से जुड़ी समस्याएँ होने लगीं। बार-बार डॉक्टर, दवाइयाँ और परहेज़ — यह सब रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया था।
इसी दौरान श्वेता ने एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान दिया — हम अक्सर बाजार से कोई भी पैकेज्ड फूड खरीदते समय सिर्फ उसके “healthy” दिखने वाले दावे पर भरोसा कर लेते हैं। हम शायद ही कभी पीछे लिखे छोटे-छोटे अक्षरों में दिए गए ingredients को पढ़ते हैं।
जब उन्होंने इन पैकेज्ड फूड्स की सच्चाई को समझा, तो उन्हें एहसास हुआ कि “हेल्दी” कहे जाने वाले कई उत्पादों में भी रिफाइंड फ्लोर, प्रिज़र्वेटिव्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर और रिफाइंड शुगर भरी होती है।
यहीं से शुरू हुई उनकी सोच कि अगर घर में बनी चीज़ें स्वास्थ्य सुधार सकती हैं, तो क्यों न इन्हें बड़े स्तर पर लोगों तक पहुँचाया जाए?
घर की रसोई से ब्रांड तक का सफर
शुरुआत में यह सिर्फ एक घरेलू प्रयोग था। श्वेता ने अपने परिवार के लिए पारंपरिक सामग्री से ऐसे snacks बनाना शुरू किया जो स्वाद में भी अच्छे हों और पाचन के लिए भी हल्के।
धीरे-धीरे उन्होंने पाया कि millets — जैसे ज्वार, रागी और बाजरा — सिर्फ पौष्टिक ही नहीं बल्कि बेहद बहुमुखी भी हैं। इनसे बने snacks स्वाद में किसी भी मैदा-आधारित snack से कम नहीं होते।
परिवार के लोगों की सेहत में सुधार दिखने लगा। पेट की समस्याएँ कम हुईं, ऊर्जा बढ़ी और सबसे बड़ी बात — लोगों ने महसूस किया कि उन्हें स्वाद से समझौता नहीं करना पड़ा।
यहीं से उनके प्रयासों को पहचान मिलने लगी। दोस्तों और रिश्तेदारों ने ऑर्डर देना शुरू किया। धीरे-धीरे यह शौक एक पहचान बन गया — और “Gut Feeling” नाम से एक ब्रांड का जन्म हुआ।

Millets का जादू — परंपरा से आधुनिकता तक
श्वेता का मानना है कि भारतीय खान-पान में पहले से ही स्वास्थ्य का विज्ञान छिपा हुआ है। मिलेट्स यानी मोटे अनाज सदियों से हमारे भोजन का हिस्सा रहे हैं।
उनके उत्पादों की खासियत है:
- मैदा का बिल्कुल उपयोग नहीं
- रिफाइंड शुगर से दूरी
- प्राकृतिक अर्क से flavor
- कोई artificial color या preservatives नहीं
आज जब दुनिया “superfood” के नाम पर महंगे विदेशी विकल्पों की ओर भाग रही है, श्वेता लोगों को याद दिला रही हैं कि असली सुपरफूड तो हमारे अपने खेतों में उगते हैं।

Healthy Snacking का नया अर्थ
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में snacking एक जरूरत बन चुकी है। लेकिन अक्सर यह जरूरत हमारी सेहत पर भारी पड़ती है।
श्वेता की सोच अलग है —
“स्नैकिंग को दोषी मत मानिए, उसे सही दिशा दीजिए।”
उनके ब्रांड के snacks, cookies और chocolates इस सोच का उदाहरण हैं:
- चॉकलेट्स में couverture का उपयोग
- बिना refined sugar
- Gut friendly सामग्री
इससे लोग guilt-free अपनी cravings पूरी कर सकते हैं।

‘Gut Health’ क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
आज के समय में डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट भी मानते हैं कि हमारी सेहत का बड़ा हिस्सा हमारे पेट से जुड़ा होता है।
पाचन तंत्र ठीक हो तो:
- Immunity मजबूत रहती है
- ऊर्जा स्तर बेहतर होता है
- मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है
जब आपका गट खुश होगा, तो आप भी खुश होंगे।
महिलाओं के लिए प्रेरणा की कहानी
श्वेता की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि यह दिखाती है कि एक महिला कैसे अपने घरेलू अनुभव को उद्यमिता में बदल सकती है।
उन्होंने न कोई बड़ी निवेश राशि से शुरुआत की और न ही किसी बड़े कॉर्पोरेट बैकग्राउंड से। उनके पास था- समस्या को समझने की संवेदनशीलता, सीखने का धैर्य और कुछ नया करने का साहस।
आज उनका सफर कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है — खासकर उन महिलाओं के लिए जो अपने घर से कुछ शुरू करना चाहती हैं।

स्वस्थ खाने की ओर बदलती मानसिकता
श्वेता मानती हैं कि सबसे बड़ी चुनौती लोगों की आदतों को बदलना है।
हम अक्सर तुरंत स्वाद के पीछे भागते हैं, पैकेजिंग देखकर निर्णय लेते हैं और लंबे समय की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन धीरे-धीरे लोग जागरूक हो रहे हैं। अब ग्राहक ingredient lists पढ़ रहे हैं मिलेट्स को अपना रहे हैं और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बना रहे हैं।
इस बदलाव में श्वेता जैसे उद्यमियों की बड़ी भूमिका है।

Passion से पहचान तक: एक ‘Gut Feeling’ जो सच साबित हुई
जो सफर एक घरेलू समाधान के रूप में शुरू हुआ था, वह आज श्वेता की पहचान बन चुका है। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि हर समस्या में एक अवसर छिपा होता है जुनून अगर ईमानदार हो तो वह लोगों की जिंदगी बदल सकता है और सबसे महत्वपूर्ण — स्वास्थ्य से बड़ा कोई निवेश नहीं होता।
आज जब हम फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाने के दौर में जी रहे हैं, श्वेता सिंह बैजल का प्रयास हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का संदेश देता है।
उनकी “Gut Feeling” सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक आंदोलन है — स्वस्थ, जागरूक और संतुलित जीवन की ओर एक कदम। और शायद यही वजह है कि उनकी कहानी सिर्फ उद्यमिता की नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, जागरूकता और सकारात्मक बदलाव की कहानी बन गई है।
क्योंकि आखिरकार… जब हमारा Gut अच्छा महसूस करता है, तभी जीवन भी अच्छा महसूस करता है।
