एक ऐसी दुनिया की, जहां नदियां सूख जाएं, जंगल खत्म हो जाएं और पक्षियों की चहचहाहट केवल यादों में रह जाए। बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।
हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सबसे बड़ा वैश्विक अभियान है। इसकी शुरुआत 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन के बाद हुई थी। तब से यह दिन लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं का योगदान
पर्यावरण संरक्षण की बात हो और महिलाओं के योगदान का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। भारत की कई महिलाओं ने अपने कार्यों से प्रकृति को बचाने और समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वंदना शिवा
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् वंदना शिवा ने ‘नवदान्या’ आंदोलन की स्थापना की। उन्होंने जैविक खेती, जैव विविधता और पारंपरिक बीजों के संरक्षण को बढ़ावा देकर किसानों को प्रकृति के अनुकूल खेती के लिए प्रेरित किया।

सुनीता नरेन
सुनीता नरेन पर्यावरण नीति, वायु प्रदूषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर लंबे समय से काम कर रही हैं। उनकी पहल ने पर्यावरण संबंधी नीतियों और जागरूकता अभियानों को नई दिशा दी है।

डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन
असम की वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन ने विलुप्तप्राय हरकिला (Greater Adjutant Stork) पक्षी के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया। उनके प्रयासों से इस दुर्लभ पक्षी की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

राहीबाई सोमा पोपेरे
‘सीड मदर’ के नाम से प्रसिद्ध राहीबाई पारंपरिक और दुर्लभ बीजों के संरक्षण का कार्य कर रही हैं। उन्होंने देशी बीजों को बचाकर कृषि जैव विविधता को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

तुलसी गौड़ा
कर्नाटक की तुलसी गौड़ा ने अपने जीवन में एक लाख से अधिक पौधे लगाकर वन संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया। प्रकृति के प्रति उनके समर्पण के लिए उन्हें पद्म श्री सम्मान से भी नवाजा गया।

यमुना टुडू
‘लेडी टार्जन’ के नाम से मशहूर यमुना टुडू ने झारखंड में जंगलों की अवैध कटाई रोकने के लिए महिलाओं की टीम बनाई और हजारों पेड़ों को बचाने का अभियान चलाया।

मेधा पाटकर
मेधा पाटकर ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के माध्यम से नदियों, जंगलों और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवाज उठाई। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा।

रागिनी दीक्षित
रागिनी दीक्षित पर्यावरण संरक्षण को रचनात्मक रूप से बढ़ावा दे रही हैं। वह पुराने टायर, पाइप, जूते और जींस जैसी बेकार वस्तुओं को खूबसूरत प्लांटर्स में बदलकर रीसाइक्लिंग का संदेश देती हैं। साथ ही गौरैया संरक्षण के लिए भी लगातार प्रयासरत हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सिखाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। हर व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़ा बदलाव ला सकता है। पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
वंदना शिवा से लेकर रागिनी दीक्षित तक, इन महिलाओं ने साबित किया है कि एक व्यक्ति का संकल्प भी समाज और पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें इन प्रेरणादायक महिलाओं से सीख लेते हुए प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि प्रकृति बचेगी, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
