मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मासिक स्वच्छता दिवस पर जिला अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक के दौरान घोषणा की कि अब दिल्ली के हर स्कूल को स्वच्छ वॉशरूम बनाए सैनिटरी नैपकिन रखने और लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए नियमित मासिक स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता होगी। नए योजना के तहत, स्कूलों में मासिक स्वच्छता के लिए स्वच्छता नैपकिन, आंतरिक वस्त्र और अन्य स्वच्छता आवश्यक वस्तुओं से सुसज्जित मेडिकल कमरे और “मासिक स्वच्छता के कोने” स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने कहा कि स्कूल वॉशरूम में स्वच्छता नैपकिन विक्री मशीनों की स्थापना भी तेजी से की जाएगी। मासिक स्वच्छता की पहलों के अलावा, सरकार ने अधिकारियों को स्कूल-वारी एचपीवी टीकाकरण डेटा और स्कूल के बुनियादी सुविधाओं, जिनमें आरओ वॉटर कूलर, व्हाइटवॉशिंग काम और प्लांटेशन ड्राइव, जून और अगस्त के बीच की कामशाली के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए निर्देशित किया है।
अब हर स्कूल में मिलेंगी फ्री सैनिटरी नैपकिन, हेल्पलाइन और “मेंस्ट्रुएशन कॉर्नर”
देश की राजधानी दिल्ली में अब स्कूलों में मासिक स्वच्छता यानी Menstrual Hygiene को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्राओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए कई नई योजनाओं की घोषणा की है। इन कदमों का उद्देश्य केवल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक संकोच को खत्म करना और स्कूलों को अधिक सुरक्षित एवं संवेदनशील बनाना भी है।
यह घोषणा Rekha Gupta ने विश्व मासिक स्वच्छता दिवस के अवसर पर जिला अधिकारियों और स्कूल प्रिंसिपलों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसे शर्म या चुप्पी से नहीं, बल्कि जागरूकता और सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए।
स्कूलों में बनेंगे “मेंस्ट्रुएशन कॉर्नर”
नई योजना के तहत अब दिल्ली के स्कूलों में विशेष “Menstruation Corners” बनाए जाएंगे। ये ऐसे विशेष स्थान होंगे जहां छात्राओं को जरूरत के समय सैनिटरी नैपकिन, अतिरिक्त वस्त्र और अन्य स्वच्छता संबंधी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने निर्देश दिया है कि स्कूलों के मेडिकल रूम को भी बेहतर बनाया जाए ताकि किसी भी छात्रा को मासिक धर्म के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी लड़की को केवल सुविधाओं की कमी के कारण स्कूल छोड़ना या क्लास मिस न करनी पड़े।
सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनों पर जोर
दिल्ली सरकार ने स्कूल वॉशरूम में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाने की प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है। साथ ही इन मशीनों की नियमित मॉनिटरिंग और समय पर रीफिलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहले कई स्कूलों में मशीनें तो लगाई गई थीं, लेकिन उनमें नियमित रूप से नैपकिन उपलब्ध नहीं होते थे। सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में छात्राओं ने शिकायत की थी कि मशीनें खराब रहती हैं या उनमें स्टॉक खत्म हो जाता है।
अब सरकार पूरे सिस्टम को केंद्रीकृत करने की तैयारी में है ताकि हर छात्रा को उच्च गुणवत्ता वाले biodegradable sanitary pads मिल सकें।
लड़कों को भी दी जाएगी मासिक स्वच्छता की जानकारी
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि जागरूकता कार्यक्रम केवल लड़कियों तक सीमित नहीं रहेंगे। सरकार ने निर्देश दिया है कि स्कूलों में लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए नियमित मासिक स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मासिक धर्म को लेकर समाज में मौजूद झिझक और मिथकों को खत्म करने के लिए लड़कों को भी इस विषय पर शिक्षित करना जरूरी है। इससे स्कूलों का वातावरण अधिक संवेदनशील और सहयोगात्मक बन सकेगा।
टोल-फ्री शिकायत नंबर भी होगा शुरू
सरकार ने छात्रों और अभिभावकों के लिए एक टोल-फ्री शिकायत नंबर शुरू करने की भी घोषणा की है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से स्कूलों से जुड़ी शिकायतें और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंचाए जा सकेंगे।
इस नंबर को स्कूलों की दीवारों और मुख्य गेट पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर छात्राएं आसानी से मदद मांग सकें।
HPV वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य जागरूकता पर भी फोकस
मासिक स्वच्छता अभियान के साथ-साथ सरकार ने HPV Vaccination Data एकत्र करने के निर्देश भी दिए हैं। HPV यानी Human Papillomavirus एक ऐसा वायरस है जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है।
सरकार चाहती है कि स्कूल स्तर पर ही इस विषय पर जागरूकता बढ़ाई जाए और अभिभावकों की सहमति से छात्राओं को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाए।

स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की तैयारी
दिल्ली सरकार ने केवल मासिक स्वच्छता तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। स्कूलों में RO Water Coolers लगाने, भवनों की सफेदी कराने और जून से अगस्त तक Plantation Drive चलाने की भी योजना बनाई गई है।
इन कदमों का उद्देश्य छात्रों के लिए साफ, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण तैयार करना है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुए कदम
दिल्ली सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने मासिक स्वच्छता को Article 21 यानी “जीवन के अधिकार” का हिस्सा माना था। अदालत ने कहा था कि छात्राओं को मासिक स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकारों की जिम्मेदारी है।
इसके बाद कई राज्यों में स्कूलों में सैनिटरी सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हुई। दिल्ली सरकार की नई पहल को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चुनौतियां अभी भी बाकी
हालांकि इस योजना की सराहना हो रही है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू करना होगी।
पिछले वर्षों में भी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन वितरण में रुकावट की खबरें सामने आई थीं। यहां तक कि अदालतों को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।
मासिक धर्म को सम्मान से देखने की जरूरत
भारत में आज भी कई लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीं जातीं। कई जगहों पर इसे लेकर शर्म, डर और गलत धारणाएं मौजूद हैं।
ऐसे में दिल्ली सरकार की यह पहल केवल स्वास्थ्य योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
यदि स्कूलों में सुरक्षित माहौल, साफ वॉशरूम, जरूरी सुविधाएं और सही जागरूकता मिलेगी, तो लाखों छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।
