रात को गहरी नींद में अचानक पैर में तेज दर्द और खिंचाव महसूस होना काफी परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। कई बार calf muscle इतनी तेजी से सिकुड़ती है कि कुछ सेकंड या मिनट के लिए पैर हिलाना भी मुश्किल हो जाता है। इसे आमतौर पर Nighttime Leg Cramps कहा जाता है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखने को मिल सकती है, लेकिन युवा लोगों को भी इसका सामना करना पड़ सकता है।
अक्सर लोग रात में होने वाली ऐंठन को सीधे पानी या मैग्नीशियम की कमी से जोड़ देते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कई बार सोने की position, दिनभर की physical activity और मांसपेशियों के लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने की वजह से भी पैर में cramp हो सकता है।
सोते समय पैर में ऐंठन क्यों होती है?
दिनभर हमारा शरीर लगातार movement में रहता है। चलने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य गतिविधियों के दौरान पैरों की muscles लगातार सिकुड़ती और फैलती रहती हैं। लेकिन रात में जब हम लंबे समय तक एक ही position में रहते हैं, तो muscles की movement काफी कम हो जाती है।
अगर सोते समय पैर नीचे की ओर मुड़ा हुआ रहे और पंजे लंबे समय तक उसी स्थिति में रहें, तो calf muscle छोटी और सिकुड़ी हुई स्थिति में रह सकती है। इसी कारण अचानक muscle contraction हो सकता है और तेज cramp महसूस हो सकता है।
इसके अलावा अगर किसी दिन सामान्य से ज्यादा walking की हो, लंबे समय तक खड़े रहे हों या अचानक physical activity बढ़ गई हो, तो भी रात में मांसपेशियों में ऐंठन की संभावना बढ़ सकती है।
Cramp पड़ने पर तुरंत क्या करें?
जब आधी रात को अचानक पैर में cramp पड़े तो घबराने के बजाय muscle को धीरे-धीरे relax करने की कोशिश करें।
सबसे पहले पैर को सीधा करें और पंजे को अपनी तरफ यानी shin की दिशा में धीरे-धीरे खींचें। इससे calf muscle को stretch करने में मदद मिल सकती है। बहुत ज्यादा जोर लगाने से बचें।
अगर संभव हो तो धीरे-धीरे खड़े होकर कुछ कदम चलने की कोशिश भी की जा सकती है। हल्की massage करने से भी मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। कुछ लोगों को गर्म पानी से नहाने या heating pad जैसी हल्की गर्माहट से भी राहत मिलती है।

रात में होने वाली ऐंठन से कैसे बचें?
अगर आपको बार-बार रात में leg cramps होते हैं, तो अपनी daily routine में कुछ छोटे बदलाव किए जा सकते हैं।
सोने से पहले stretching:
बिस्तर पर जाने से पहले एक-दो मिनट तक calf और hamstring की हल्की stretching करें। इससे muscles को relax करने में मदद मिल सकती है।
दिनभर active रहें:
बहुत लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में थोड़ा चलें। शाम के समय हल्की walk भी routine का हिस्सा बनाई जा सकती है।
पानी पर्याप्त मात्रा में लें:
दिनभर पर्याप्त hydration बनाए रखना जरूरी है। हालांकि हर leg cramp को dehydration की वजह मानना सही नहीं है।
सोने की position पर ध्यान दें:
ऐसी position से बचें जिसमें पैर लंबे समय तक नीचे की ओर मुड़ा रहे। जरूरत पड़ने पर pillow का इस्तेमाल करके पैरों को आरामदायक position में रखा जा सकता है।
अचानक activity न बढ़ाएं:
अगर आप सामान्य तौर पर ज्यादा exercise नहीं करते हैं, तो अचानक बहुत ज्यादा walking या workout शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे activity बढ़ाएं।
क्या हर बार Magnesium की जरूरत होती है?
Leg cramps होते ही कई लोग magnesium supplements लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन रात में होने वाली सामान्य leg cramps के लिए magnesium को एक निश्चित इलाज मानना सही नहीं है। इसके फायदे को लेकर पर्याप्त मजबूत evidence नहीं है।
इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी supplement को नियमित रूप से लेना जरूरी नहीं है। अगर cramps बार-बार हो रहे हैं, तो पहले इसके संभावित कारण को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
कभी-कभार होने वाला leg cramp आमतौर पर गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या आपकी नींद लगातार प्रभावित करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खास तौर पर अगर ऐंठन हमेशा एक ही पैर में होती है और उसके साथ सूजन, लालिमा, गर्माहट या लगातार दर्द भी मौजूद हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
इसी तरह पैर में cramp के साथ सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी महसूस हो तो भी चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। अगर cramps किसी नई दवा शुरू करने के बाद दिखाई देने लगे हैं, तो इसकी जानकारी दवा लिखने वाले डॉक्टर को दें।
कुछ दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी muscle cramps से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए लगातार या असामान्य symptoms होने पर खुद से कारण तय करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सही तरीका है।
छोटी-सी सावधानी, बेहतर नींद
रात में होने वाली पैर की ऐंठन अक्सर कुछ समय के लिए ही रहती है, लेकिन इसका दर्द नींद को जरूर प्रभावित कर सकता है। सोने से पहले हल्की stretching, नियमित physical activity, पर्याप्त hydration और सही sleeping position जैसी छोटी आदतें इसे कम करने में मदद कर सकती हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर cramp को सिर्फ पानी या magnesium की कमी मानकर खुद से इलाज शुरू न करें। अगर ऐंठन लगातार हो रही है या उसके साथ सूजन, लालिमा, कमजोरी, सुन्नपन या लगातार दर्द जैसे लक्षण हैं, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
