भारत की युवा योगासन प्रतिभा वान्या शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित 4वीं UYSF एशिया पैसिफिक योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2026 में वान्या ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही उन्हें प्रतियोगिता के प्रतिष्ठित “Champion of Champions” खिताब से भी सम्मानित किया गया।
5 सितंबर 2026 को बैंकॉक में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में 7 देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम, श्रीलंका और बांग्लादेश सहित विभिन्न देशों के खिलाड़ियों के बीच भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वान्या ने अपने प्रदर्शन से खास पहचान बनाई।
दो स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक
वान्या ने प्रतियोगिता की Traditional Yogasana स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। संतुलन, लचीलापन, एकाग्रता और शरीर पर नियंत्रण के साथ उन्होंने इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने Artistic Solo Yogasana में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कठिन योगासनों और शानदार प्रस्तुति के साथ वान्या ने इस स्पर्धा में भी गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
एक ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतना उनके प्रदर्शन की निरंतरता को दर्शाता है।

Champion of Champions का खिताब
दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद वान्या को “Champion of Champions” के प्रतिष्ठित खिताब से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान प्रतियोगिता में उनके समग्र प्रदर्शन को एक और खास पहचान देता है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में इस स्तर की उपलब्धि वान्या के निरंतर अभ्यास, अनुशासन और योगासन के प्रति समर्पण को सामने लाती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय योगासन की पहचान
योग भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में योगासन ने खेल के रूप में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई है। ऐसे में युवा खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और उपलब्धियां भारतीय योगासन को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में योगदान देती हैं।
बैंकॉक में वान्या शर्मा का प्रदर्शन इसी दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। दो स्वर्ण पदक और Champion of Champions का खिताब हासिल कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय प्रतिभा का परिचय दिया है।
वान्या की यह उपलब्धि उनके परिवार, प्रशिक्षकों और विद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि लगातार अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगी मंच पर बेहतर प्रदर्शन की क्षमता युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकती है।
